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आंध्र-ओडिशा में चक्रवाती तूफान का असर, आंध्र प्रदेश के तट से चक्रवात अर्नब टकराया; भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित; कई पुल और सड़कें बहीं

आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों में चक्रवाती तूफान के असर से भारी बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है। ओडिशा के दक्षिणी जिलों में लगातार बारिश के कारण कई पुल और सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर करीब 5 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।

मलकानगिरी जिले में भारी बारिश के कारण कई पुलों के बहने से सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। मलकानगिरी, कालीमेला, मोटू और पोडिया के बीच आवाजाही बाधित है। वहीं, NH-326 पर बड़ी संख्या में वाहन फंसे होने की जानकारी सामने आई है।

आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के कलिंगपट्टनम और आसपास के इलाकों में भी तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। यहां हवा की गति करीब 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक दर्ज की गई। विजयवाड़ा में लगातार बारिश से निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। कई स्कूलों में लगातार दूसरे दिन अवकाश रखा गया है।

बंगाल और पहाड़ी इलाकों में भी अलर्ट

चक्रवाती सिस्टम के प्रभाव से पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश का अनुमान है। दक्षिण 24 परगना में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। तटीय क्षेत्रों के लोगों को सतर्क रहने और मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।

दार्जिलिंग और कलिम्पोंग में भारी बारिश के कारण भूस्खलन की आशंका को देखते हुए चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग लगातार सिस्टम की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।

देश के कई राज्यों में बारिश का असर

चक्रवाती सिस्टम और मानसूनी गतिविधियों के कारण देश के कई हिस्सों में मौसम बदला हुआ है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, गोंडा, महराजगंज, उन्नाव और प्रयागराज में बारिश हुई है। बिहार के सभी 38 जिलों में आंधी और बारिश को लेकर चेतावनी जारी की गई है।

मध्य प्रदेश में भी 25 और 26 सितंबर को बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है। वहीं, हिमाचल प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। दूसरी ओर पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत के कई हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू हो चुकी है।

चक्रवात कैसे बनता है?

चक्रवात गर्म समुद्री पानी के ऊपर बनने वाला शक्तिशाली तूफानी सिस्टम है। समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने पर गर्म और नम हवा तेजी से ऊपर उठती है, जिससे समुद्र के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बनता है। आसपास की हवा इस क्षेत्र की ओर बढ़ती है और पृथ्वी के घूमने के प्रभाव के कारण घूमने लगती है। यही प्रक्रिया मजबूत होकर चक्रवाती तूफान का रूप ले सकती है।

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