नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान में अमेरिकी सैन्य हमलों के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारत सरकार ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह पर हुए अमेरिकी हमलों में भारत द्वारा संचालित शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि टर्मिनल पूरी तरह सुरक्षित है और वहां संचालन सामान्य रूप से जारी है।
भारत के इस बयान के बाद उन आशंकाओं पर विराम लग गया है, जिनमें अमेरिकी कार्रवाई के कारण चाबहार बंदरगाह पर भारत के निवेश और परिचालन प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही थी। चाबहार पोर्ट भारत की विदेश नीति, क्षेत्रीय व्यापार और मध्य एशिया तक पहुंच की रणनीति का एक अहम हिस्सा माना जाता है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत लगातार ईरान में स्थिति पर नजर बनाए हुए है और स्थानीय अधिकारियों के साथ संपर्क में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अमेरिकी हमलों का असर शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल पर नहीं पड़ा है। टर्मिनल सुरक्षित है और वहां सभी गतिविधियां सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं।
चाबहार बंदरगाह भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच व्यापारिक संपर्क बढ़ाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। भारत ने इस परियोजना में महत्वपूर्ण निवेश किया है और कई वर्षों से यहां बुनियादी ढांचे के विकास एवं संचालन में सहयोग कर रहा है। इसी बंदरगाह के माध्यम से भारत पाकिस्तान के रास्ते का उपयोग किए बिना अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक सामान पहुंचाने में सक्षम होता है। यही कारण है कि यह परियोजना भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
भारत द्वारा संचालित शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल चाबहार पोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से कंटेनर और अन्य माल की आवाजाही होती है तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने इस टर्मिनल के आधुनिकीकरण, उपकरणों की आपूर्ति और संचालन क्षमता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
हाल के दिनों में ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद यह आशंका जताई जा रही थी कि कहीं चाबहार पोर्ट भी हमलों की चपेट में तो नहीं आ गया। हालांकि भारत सरकार के आधिकारिक बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय संचालन वाला क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित है और किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है। इससे भारत के व्यापारिक हितों और क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं को तत्काल कोई खतरा नहीं माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चाबहार बंदरगाह भारत की कनेक्टिविटी नीति का प्रमुख आधार है। यह बंदरगाह अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) से भी जुड़ा हुआ है, जिसके माध्यम से भारत, ईरान, रूस और यूरोप के बीच व्यापार को गति देने की योजना है। ऐसे में यदि इस बंदरगाह को कोई नुकसान पहुंचता, तो इसका प्रभाव भारत के दीर्घकालिक रणनीतिक हितों पर भी पड़ सकता था।
भारत ने एक बार फिर सभी पक्षों से संयम बरतने और क्षेत्र में तनाव कम करने की अपील की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और अपने नागरिकों तथा राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
फिलहाल भारत के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि चाबहार बंदरगाह का शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल पूरी तरह सुरक्षित है और वहां व्यापारिक गतिविधियां बिना किसी बाधा के जारी हैं। ऐसे में भारत की इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय परियोजना पर तत्काल किसी प्रतिकूल प्रभाव की आशंका नहीं है।
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