लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अयोध्या स्थित हनुमानगढ़ी को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान पर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री के बयान पर ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी खुलकर उनके समर्थन में सामने आए हैं। अखिलेश यादव ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर लगातार दो पोस्ट करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राज्य सरकार पर तीखा
सपा प्रमुख ने अपने पहले पोस्ट में भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा कि भाजपा की “चोरी-लूट-छल-कपट-झूठ-फरेब” की राजनीति अब प्रभु श्रीराम के मंदिर से आगे बढ़कर हनुमानगढ़ी तक पहुंच गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक स्थलों और आस्था के विषयों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। अखिलेश यादव ने कहा कि धर्म और आस्था को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए तथा धार्मिक स्थलों को विवाद का केंद्र नहीं बनाया जाना चाहिए।
अपने दूसरे पोस्ट में भी सपा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री के बयान को लेकर सवाल उठाए और कहा कि यदि किसी विषय पर सार्वजनिक रूप से दावा किया जाता है तो उसके समर्थन में स्पष्ट तथ्य और प्रमाण भी सामने आने चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता के सामने तथ्यों के आधार पर बात रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है और सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता बनाए रखना प्रत्येक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति का दायित्व है।
यह पूरा विवाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज अदा किए जाने का उल्लेख किया था। मुख्यमंत्री के इस बयान पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाते हुए कहा कि यदि ऐसा कोई दावा किया जा रहा है तो उसके समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत किए जाने चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर बहस तेज हो गई।
समाजवादी पार्टी ने इस मुद्दे को सरकार की कार्यशैली से जोड़ते हुए कहा कि प्रदेश सरकार को धार्मिक विषयों पर विवाद पैदा करने के बजाय विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। पार्टी नेताओं का कहना है कि जनता महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं से जूझ रही है, जबकि राजनीतिक विमर्श का केंद्र बार-बार धार्मिक विवादों को बनाया जा रहा है।
दूसरी ओर भाजपा लगातार यह कहती रही है कि उसकी सरकार सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक स्थलों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है तथा अयोध्या सहित प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों का अभूतपूर्व विकास कराया गया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए सरकार के बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश करता है और अनावश्यक विवाद खड़ा करने का प्रयास करता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक विषय लंबे समय से राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। अयोध्या, काशी और मथुरा जैसे मुद्दों पर विभिन्न राजनीतिक दल समय-समय पर अपनी-अपनी राय रखते रहे हैं। ऐसे में हनुमानगढ़ी को लेकर शुरू हुआ यह विवाद भी आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक स्थलों से जुड़े किसी भी दावे या टिप्पणी का व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों और राजनीतिक दलों को ऐसे मामलों में तथ्यों के आधार पर संयमित भाषा का प्रयोग करना चाहिए, ताकि अनावश्यक भ्रम या तनाव की स्थिति उत्पन्न न हो।
फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है। समाजवादी पार्टी मुख्यमंत्री के बयान को लेकर सरकार से जवाब मांग रही है, जबकि भाजपा अपने रुख पर कायम है। आने वाले दिनों में इस विषय पर अन्य राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं, जिससे प्रदेश की राजनीति में यह मुद्दा और अधिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।
News Wani
