Breaking News

Iran-US Conflict: अब तक किसने किया ज्यादा खर्च, आंकड़े चौंकाने वाले

फरवरी 2026 से जारी ईरान-अमेरिका संघर्ष में अमेरिका अब तक 30 अरब डॉलर से अधिक खर्च कर चुका है, जिसमें प्रतिदिन की लागत 2 अरब डॉलर तक पहुंच रही है. आइए जानें कि अब तक दोनों देशों का कितना खर्चा हुआ.

ईरान और अमेरिका के बीच शुरू हुई यह जंग अब केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट बन चुकी है. फरवरी 2026 के अंत से शुरू हुए इस संघर्ष में जिस तरह से हथियारों और संसाधनों का इस्तेमाल हो रहा है, उसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. हार्वर्ड कैनेडी स्कूल की हालिया रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि इस जंग में अमेरिका ने अब तक 30 अरब डॉलर से अधिक की राशि खर्च कर दी है. यह खर्च किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को हिला देने के लिए काफी है, और इसका असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है.

अमेरिका का बढ़ता आर्थिक बोझ और दैनिक खर्चे

अमेरिका के लिए इस जंग का हर एक दिन बेहद महंगा साबित हो रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका हर दिन लगभग 890 मिलियन डॉलर से लेकर 2 अरब डॉलर तक पानी की तरह बहा रहा है. जंग के शुरुआती महज 6 दिनों के भीतर ही 11.3 अरब डॉलर से 12.7 अरब डॉलर के बीच खर्च हो चुके थे. इसमें नौसेना की तैनाती, खुफिया जानकारी जुटाने का काम और हवाई अभियानों का खर्च शामिल है. इतना ही नहीं, हथियारों की बढ़ती मांग और युद्ध की तैयारी ने अमेरिकी सैन्य तैयारी को एक कठिन स्थिति में डाल दिया है, जिससे हथियारों को दोबारा स्टॉक करने का खर्च भी बेतहाशा बढ़ गया है.

टॉमहॉक मिसाइल और हथियारों का बेहिसाब खर्च

इस संघर्ष में हथियारों का इस्तेमाल जिस रफ्तार से हो रहा है, उसकी कल्पना करना भी मुश्किल है. अमेरिका के खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा मिसाइलों और गोला-बारूद में जा रहा है. एक अकेले टॉमहॉक मिसाइल की कीमत लगभग 3.5 मिलियन डॉलर होती है. जब ऐसी हजारों मिसाइलें कुछ ही हफ्तों में इस्तेमाल कर ली जाती हैं, तो कुल बजट का अंदाजा लगाना सहज है. द गार्जियन की रिपोर्ट्स भी इस बात की पुष्टि करती हैं कि हथियारों के जखीरे को फिर से भरने की प्रक्रिया अमेरिकी खजाने पर भारी पड़ रही है, जो इस युद्ध की भीषणता को दर्शाती है.

ईरान की सैन्य कार्रवाई और संसाधनों का नुकसान

जहां एक ओर अमेरिका के खर्चों के स्पष्ट और सटीक आंकड़े मौजूद हैं, वहीं ईरान के खर्चों का कोई औपचारिक आर्थिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है. लेकिन, सैन्य गतिविधियों के आधार पर यह स्पष्ट है कि ईरान भी अपने संसाधनों का एक बड़ा हिस्सा इस जंग में झोंक चुका है. मार्च की शुरुआत तक ईरान ने लगभग 2,500 ड्रोन और मिसाइलें दागकर अपनी आक्रामकता दिखाई थी. ईरान की एयर डिफेंस सिस्टम को भारी नुकसान उठाना पड़ा है और कई महत्वपूर्ण सैन्य बुनियादी ढांचे नष्ट हो गए हैं. प्रत्यक्ष आर्थिक आंकड़ों के बजाय, ईरान को अपनी खोई हुई सैन्य परिसंपत्तियों के रूप में बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है.

जंग का भविष्य और वैश्विक आर्थिक प्रभाव

दोनों देशों के बीच का यह आर्थिक खिंचाव केवल उनके अपने खजाने तक सीमित नहीं है. जैसे-जैसे जंग का समय आगे बढ़ रहा है, पूरी दुनिया पर इसका असर स्पष्ट दिखने लगा है. अमेरिका जिस तरह से प्रतिदिन अरबों डॉलर का खर्च कर रहा है, वह उसके राजकोषीय घाटे और वैश्विक मुद्रा स्थिरता को भी प्रभावित कर सकता है. दूसरी तरफ, ईरान का सैन्य तंत्र जिस तरह से अपनी परिसंपत्तियों का बलिदान कर रहा है, वह क्षेत्रीय सुरक्षा के संतुलन को अनिश्चित बना रहा है. यह जंग केवल मिसाइलों और ड्रोनों की नहीं, बल्कि संसाधनों की एक ऐसी दौड़ है, जो अंत में दोनों ही देशों की आंतरिक अर्थव्यवस्था को गहरा जख्म दे रही है.

About NW-Editor

Check Also

“मुजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर अटकलें तेज, गंभीर चोटों की खबरों से ईरान में हलचल”

ईरान की राजनीति में इन दिनों बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट के …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *