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एलडीए का जादुई पाउडर, सील पर छिड़का और इमारत खड़ी हो गई!

  • साहबों की लग्जरी गाड़ियाँ, बिल्डर का पेट्रोल, वाह रे तालमेल!

संवाददाता मोहम्मद सैफ
लखनऊ। मुख्यमंत्री के जीरो टॉलरेंस का मंत्र जपने वाले लोक भवन की बगल में ही कानून की धज्जियाँ उड़ती देखना किसी चमत्कार से कम नहीं है। हजरतगंज जैसे अति-विशिष्ट इलाके की बी.एन. रोड पर अनूप कुमार अग्रवाल का अवैध निर्माण लखनऊ विकास प्राधिकरण की कार्यकुशलता पर एक करारा तमाचा है।

बीती 21 फरवरी को एलडीए के लव-लश्कर ने बड़े शोर-शराबे के साथ यहाँ धारा-28(क) के तहत सील लगाई, फोटो खिंचवाई और प्रेस विज्ञप्ति जारी कर खूब वाहवाही लूटी। लेकिन शायद विभाग की उस सील में फेविकोल नहीं, बल्कि अदृश्य स्याही लगी थी। सीलिंग के बाद निर्माण रुकने के बजाय बुलेट ट्रेन की रफ्तार से भागने लगा। पार्किंग का नामोनिशान गायब है, मगर सेटिंग ऐसी फिट है कि कंपाउंडिंग (शमन) की फाइलें ओलंपिक फाइनल की तरह दौड़ रही हैं।

विभागीय अधिकारियों को आलीशान दफ्तर और लग्जरी गाड़ियाँ इसलिए दी गई हैं ताकि वे अवैध निर्माण रोक सकें, न कि बिल्डरों के मूक सहयोगी बनकर कागजी घोड़े दौड़ाएं। बिजली विभाग और पुलिस को दी गई सूचनाएं भी ढाक के तीन पात साबित हुईं। ऐसा लगता है जैसे रसूखदार बिल्डर के आगे सरकारी करंट ही खत्म हो गया है।

हैरानी की बात है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी से चंद कदमों की दूरी पर भ्रष्टाचार की यह इमारत खड़ी हो रही है। जब राजधानी के दिल में ही कानून की कब्रगाह बनाई जा रही हो, तो बाकी शहर का क्या हाल होगा? अब देखना यह है कि बाबा का बुलडोजर इस खास इमारत का रास्ता भूल गया है या फिर ड्राइवर को नक्शा समझाने की जिम्मेदारी किसी खास को दे दी गई है? एलडीए से न्याय की उम्मीद करना अब मुंगेरीलाल के हसीन सपने जैसा हो गया है।

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