कोलकाता। रानी पद्मावती के जौहर को लेकर अभिनेत्री स्वरा भास्कर की टिप्पणी पर विवाद बढ़ता जा रहा है। अब बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री ने इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पश्चिम बंगाल के लीलुआ वर्कशॉप ग्राउंड में चल रही हनुमत कथा के दौरान उन्होंने जौहर को कायरता बताए जाने पर आपत्ति जताई और इसे बहादुरी, भक्ति तथा पति के प्रति समर्पण से जोड़ा।
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि जौहर जैसी ऐतिहासिक घटनाओं को समझने के लिए उस दौर की परिस्थितियों और संस्कृति को भी समझना जरूरी है। उन्होंने स्वरा भास्कर का नाम लिए बिना उनकी टिप्पणी पर निशाना साधते हुए कहा कि आस्था और संस्कृति का विरोध करने वाले लोग जौहर की भावना को नहीं समझ सकते।
उन्होंने कहा कि रानी पद्मावती और उनके साथ जौहर करने वाली महिलाओं के बलिदान को कायरता कहना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, यह उस समय की परिस्थितियों में महिलाओं द्वारा अपनी अस्मिता और सम्मान की रक्षा के लिए लिया गया कठोर निर्णय था।
स्वरा भास्कर की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ विवाद
दरअसल, दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान स्वरा भास्कर ने फिल्म पद्मावत में दिखाए गए जौहर के दृश्य पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि ऐसे दृश्यों का असर रेप सर्वाइवर्स पर नकारात्मक हो सकता है। उनका तर्क था कि किसी महिला के साथ यौन हिंसा होने के बाद उसका जीवन समाप्त नहीं हो जाता और उसे आगे जीने का पूरा अधिकार है।
स्वरा ने यह भी सवाल उठाया था कि क्या महिलाओं की पवित्रता को उनकी जिंदगी से ज्यादा महत्वपूर्ण बताने वाले संदेश को महिमामंडित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि किसी भी महिला की जीने की इच्छा को कमतर नहीं आंका जाना चाहिए।
विवाद के बाद स्वरा ने दी सफाई
टिप्पणी पर सोशल मीडिया में प्रतिक्रिया आने के बाद स्वरा भास्कर ने सफाई भी दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने रानी पद्मावती या जौहर करने वाली महिलाओं को कायर नहीं कहा था। उनका सवाल यह था कि अगर कोई महिला यौन हिंसा की शिकार होने के बाद जीवित बचती है, तो उसे अपने जीवित रहने पर शर्मिंदा महसूस नहीं कराया जाना चाहिए।
उन्होंने अपने बयान को रेप सर्वाइवर्स के नजरिए से जोड़ते हुए कहा कि किसी भी महिला को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि हिंसा के बाद जीवित रहना उसकी कमजोरी या कायरता है।
जौहर को लेकर अलग-अलग नजरिए
रानी पद्मावती से जुड़ी जौहर की घटना भारतीय इतिहास और राजपूत परंपरा में लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। एक पक्ष इसे महिलाओं के बलिदान और सम्मान की रक्षा से जोड़कर देखता है, जबकि दूसरा पक्ष ऐतिहासिक परिस्थितियों में महिलाओं के सामने मौजूद सीमित विकल्पों और आत्मदाह की परंपरा पर सवाल उठाता है।
इसी अलग-अलग दृष्टिकोण के कारण फिल्म पद्मावत में दिखाए गए जौहर के दृश्य को लेकर भी पहले व्यापक बहस हो चुकी है। अब स्वरा भास्कर की टिप्पणी और धीरेंद्र शास्त्री की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
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