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कानपुर में पिता और तीन बेटियों की मौत से गांव में मातम: एक साथ उठीं चार अर्थियां; गम में डूबा हिरनी गांव

कानपुर। घाटमपुर क्षेत्र के हिरनी गांव में कच्चा मकान गिरने से पिता और उनकी तीन बेटियों की मौत के बाद सोमवार को गांव का माहौल बेहद गमगीन रहा। एक ही परिवार के चार सदस्यों की अर्थियां एक साथ उठीं तो परिजनों की चीख-पुकार से माहौल भारी हो गया। अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और पड़ोसी भी पहुंचे।

पैतृक घर से चारों शव बाहर निकाले गए। ग्रामीणों ने अर्थियों को कंधा दिया और अंतिम संस्कार के लिए यमुना नदी किनारे स्थित मूसानगर घाट की ओर रवाना हुए। गांव की गलियों से जब एक साथ चार अर्थियां निकलीं तो हर आंख नम नजर आई।

अंतिम संस्कार को लेकर सुबह बनी थी असमंजस की स्थिति

परिजनों ने सोमवार सुबह तत्काल सहायता और प्रशासन की ओर से किए गए वादों पर कार्रवाई न होने की बात कहते हुए अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया था। सूचना मिलने पर तहसीलदार ओमप्रकाश गांव पहुंचे और परिवार को समझाया। उन्होंने अंतिम संस्कार के लिए तत्काल 10 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराई। इसके बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए।

प्रशासन की ओर से अंतिम संस्कार के लिए वाहन, लकड़ी और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं भी उपलब्ध कराने की बात कही गई।

घायल बेटी को मिलेगी 16 लाख रुपये की राहत

हादसे में परिवार की बेटी काजल उर्फ लक्ष्मी घायल हुई थी। दैवीय आपदा राहत कोष से उसे 16 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जानी है। मकान गिरने के दौरान उसके बैंक से जुड़े जरूरी दस्तावेज मलबे में दब गए थे, जिसके कारण राहत राशि भेजने में परेशानी आ रही थी।

प्रशासन ने काजल का आधार कार्ड और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी जुटा ली है। इसके बाद राहत राशि उसके खाते में भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

पीएम आवास और अन्य सहायता का भी आश्वासन

परिवार के सामने अब रहने और आर्थिक मदद की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। प्रशासन की ओर से परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने और अन्य जरूरी सहायता दिलाने का आश्वासन दिया गया है। परिवार की ओर से रोजगार से संबंधित मदद की मांग भी रखी गई है।

चार अर्थियां निकलने के बाद गांव में पसरा सन्नाटा

अंतिम संस्कार के लिए शवों के रवाना होने के बाद हिरनी गांव में सन्नाटा छा गया। जिस घर में कुछ समय पहले तक परिवार के सदस्य रहते थे, वहां अब मातम पसरा है। हादसे की चर्चा हर तरफ है और ग्रामीण परिवार के साथ हुई इस त्रासदी से बेहद दुखी हैं।

एक साथ पिता और तीन बेटियों को खोने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी त्रासदी के बाद परिवार को तत्काल सरकारी सहायता और सुरक्षित आवास की जरूरत है।

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