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गोरखपुर घाट पर भरभराकर गिरा छज्जा: नीचे बैठे 2 वकीलों की हुई मौत; भड़के वकीलों ने किया हंगामा

गोरखपुर। राप्ती नदी किनारे स्थित गुरु गोरक्षनाथ घाट पर रविवार को बड़ा हादसा हो गया। अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे दो अधिवक्ता गुंबदनुमा छज्जे के नीचे बैठे थे, तभी अचानक छज्जा भरभराकर उनके ऊपर गिर गया। मलबे में दबने से दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई।

हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने मलबा हटाकर दोनों अधिवक्ताओं को बाहर निकाला। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद एंबुलेंस काफी देर से पहुंची। इसके बाद घायलों को ई-रिक्शा से जिला अस्पताल ले जाया गया।

इलाज के दौरान दोनों ने तोड़ा दम

हादसे में राप्तीनगर निवासी अधिवक्ता आलोक अस्थाना गंभीर रूप से घायल हुए थे। हालत नाजुक होने पर डॉक्टरों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज ले जाते समय उनकी मौत हो गई। वहीं, दूसरे अधिवक्ता संजय सिंह का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा था। देर रात उन्होंने भी दम तोड़ दिया।

घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में अधिवक्ता जिला अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल की व्यवस्थाओं और एंबुलेंस की देरी को लेकर अधिवक्ताओं ने नाराजगी जताई और काफी देर तक हंगामा किया। इस दौरान अस्पताल परिसर में तनाव की स्थिति बनी रही।

अस्पताल प्रशासन पर लगाए लापरवाही के आरोप

आलोक अस्थाना की पत्नी शालिनी अस्थाना ने पुलिस को दी शिकायत में अस्पताल में इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। शिकायत के आधार पर सीएमओ राजेश झा और जिला अस्पताल के कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

हालांकि, अस्पताल की ओर से लगाए गए आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण दिया गया है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले की जांच के बाद ही इलाज में लापरवाही के आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

निर्माण की गुणवत्ता पर भी जांच के निर्देश

घटना के बाद घाट पर बने छज्जे के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। जिलाधिकारी दीपक मीणा ने तत्कालीन जेई और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

प्रशासन के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने घटना के समय तेज झटके और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई है। हादसे के वास्तविक कारणों की जांच कराई जा रही है। एंबुलेंस के पहुंचने में हुई देरी की भी जांच के निर्देश दिए गए हैं।

2021 में हुआ था घाट का लोकार्पण

गुरु गोरक्षनाथ घाट का निर्माण सिंचाई विभाग की ओर से कराया गया था। घाट का लोकार्पण फरवरी 2021 में हुआ था। यहां अंतिम संस्कार में आने वाले लोगों के बैठने के लिए कई चबूतरे बनाए गए हैं और इनके ऊपर गुंबदनुमा छज्जे लगाए गए हैं।

बताया गया है कि घाट के निर्माण और गुणवत्ता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। इसी कारण नगर निगम की ओर से अभी तक घाट का औपचारिक हैंडओवर नहीं लिया गया है, हालांकि यहां सफाई व्यवस्था नगर निगम की ओर से कराई जाती है।

करीब 27.85 करोड़ रुपये से हुआ था सुंदरीकरण

गुरु गोरक्षनाथ घाट के सुंदरीकरण की योजना वर्ष 2019 में तैयार की गई थी। इसके निर्माण और सुंदरीकरण पर करीब 27 करोड़ 85 लाख 71 हजार रुपये खर्च किए गए थे। घाट पर लोगों की सुविधा के लिए बैठने के स्थान और अन्य निर्माण कार्य कराए गए थे।

अब एक छज्जा गिरने से दो लोगों की मौत के बाद निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर जांच की मांग तेज हो गई है।

मृतकों के परिवार को आर्थिक सहायता

प्रशासन की ओर से दोनों मृत अधिवक्ताओं के परिवारों को तत्काल चार-चार लाख रुपये की सहायता दी गई है। इसके अलावा पांच-पांच लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।

हादसे के बाद प्रशासन ने घटनास्थल का निरीक्षण कर निर्माण की स्थिति की जांच शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद हादसे के लिए जिम्मेदारी तय होने की उम्मीद है।

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