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SCO समिट में अचानक आमने-सामने आए मोदी और जिनपिंग, हाथ मिलाकर की बातचीत; आतंकवाद पर पीएम ने दिया सख्त संदेश

बिश्केक। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अचानक मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया और कुछ देर बातचीत की। दोनों के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक पहले से निर्धारित नहीं थी।

SCO समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन भी नजर आए। तीनों नेताओं की मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद यह मुलाकात चर्चा का विषय बन गई।

आतंकवाद के खिलाफ एकजुट कार्रवाई पर जोर

SCO समिट में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ सभी देशों से एकजुट होकर कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आतंकवाद से निपटने के लिए केवल आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके पूरे तंत्र को समाप्त करना जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने आतंकवाद की फंडिंग, आतंकियों की भर्ती, कट्टरपंथ और आतंकियों को मिलने वाली सुरक्षित पनाहगाहों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर सभी देशों को एक स्वर में स्पष्ट संदेश देना चाहिए और दोहरे रवैये की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों को स्पष्ट संदेश जरूरी

पीएम मोदी ने कहा कि आतंकवाद को नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल करने और आतंकियों को पनाह देने वाले देशों को स्पष्ट संदेश देना आवश्यक है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के पूरे नेटवर्क और उसे सहयोग देने वाले तंत्र को खत्म करने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया।

वैश्विक नेताओं से मिले पीएम मोदी

SCO सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न देशों के नेताओं के साथ मुलाकात की और ग्रुप फोटो में भी शामिल हुए। सम्मेलन से पहले उन्होंने किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव से भी मुलाकात की।

प्रधानमंत्री ने किर्गिस्तान में भारत से जुड़े प्रवासी भारतीयों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, ITEC के पूर्व छात्रों और योग अभ्यासकर्ताओं से भी बातचीत की।

पाकिस्तान को मिल सकती है अगली मेजबानी

SCO की मौजूदा अध्यक्षता किर्गिस्तान के पास है। सम्मेलन के बाद अध्यक्षता पाकिस्तान को सौंपे जाने की उम्मीद है। वर्ष 2027 का SCO शिखर सम्मेलन पाकिस्तान में प्रस्तावित बताया जा रहा है।

भारत-चीन संबंधों पर भी नजर

मोदी और जिनपिंग की मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है। दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव कम करने और सैन्य स्तर पर संवाद बनाए रखने को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है।

हालांकि, इस अनौपचारिक मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि शीर्ष नेताओं के बीच इस तरह की संक्षिप्त बातचीत भी दोनों देशों के बीच संवाद का रास्ता खुला रखने का संकेत देती है।

SCO में आर्थिक सहयोग पर भी चर्चा

सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। नेताओं ने मध्य एशिया और एशिया के अन्य हिस्सों के बीच संपर्क बढ़ाने तथा आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।

SCO का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना है। भारत इस संगठन में क्षेत्रीय स्थिरता, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग और पारदर्शी कनेक्टिविटी की लगातार वकालत करता रहा है।

भारत की प्राथमिकताएं स्पष्ट

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि क्षेत्रीय सहयोग तभी प्रभावी हो सकता है, जब सभी देश एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करें। उन्होंने संपर्क परियोजनाओं में पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन को भी महत्वपूर्ण बताया।

सम्मेलन के दौरान भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कठोर रुख, डिजिटल सहयोग, युवाओं के लिए अवसर और सदस्य देशों के बीच लोगों के आपसी संपर्क को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।

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