ताशकंद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों दो दिवसीय उज्बेकिस्तान दौरे पर हैं। रविवार सुबह उन्होंने राजधानी ताशकंद में आयोजित योग सत्र में हिस्सा लिया। इस दौरान पीएम मोदी ने वहां मौजूद लोगों के साथ योग किया और उन्हें विभिन्न योगासन करने का तरीका भी बताया। योग सत्र का आयोजन योग फेडरेशन ऑफ उज्बेकिस्तान की ओर से किया गया था।
प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे के दौरान ताशकंद स्थित शास्त्री मेमोरियल और महात्मा गांधी सेंटर भी जाएंगे। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा है। इससे पहले वह वर्ष 2015, 2016 और 2022 में उज्बेकिस्तान जा चुके हैं।
राष्ट्रपति मिर्जियोयेव से होगी द्विपक्षीय बैठक
दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी। बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग को मजबूत करने के मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान के उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग के नए अवसरों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। दोनों देश आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने के रास्तों पर चर्चा करेंगे।
भारतीय समुदाय से भी मिले पीएम मोदी
उज्बेकिस्तान पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ताशकंद में भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की। इस दौरान कुछ महिलाओं ने उन्हें राखी भी बांधी। एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ एक ही कार में यात्रा की।
प्रधानमंत्री ने ताशकंद के यांगी उज्बेकिस्तान पार्क का भी दौरा किया और वहां स्थित स्मारक स्तंभ के सामने तस्वीर खिंचवाई।
उज्बेकिस्तान के बाद किर्गिस्तान जाएंगे मोदी
उज्बेकिस्तान दौरा पूरा करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। वहां वह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे।
SCO समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात भी हो सकती है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मध्य एशिया
मध्य एशिया भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां तेल, गैस, यूरेनियम और कई महत्वपूर्ण खनिजों के बड़े भंडार हैं। भारत ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ इन देशों के साथ व्यापार और परिवहन संपर्क बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहा है।
इसके अलावा अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर भी मध्य एशियाई देशों के साथ सहयोग भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है।
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