काठमांडू। नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। बाढ़ के बाद अब प्रशासन की ओर से जारी किए गए अलर्ट की टाइमिंग को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्हें सुबह करीब 7:30 बजे ही बाढ़ के खतरे की जानकारी मिल गई थी, जबकि सरकारी स्तर पर SMS अलर्ट करीब दो घंटे बाद भेजा गया।
मौसम विभाग के अनुसार, चीन की ओर से रसुवा जिला प्रशासन को बाढ़ की सूचना सुबह करीब 9 बजे मिली। इसके बाद नदी के दोनों किनारों पर रहने वाले लोगों को सुबह 9:15 बजे SMS अलर्ट भेजे जाने की बात सामने आई है। वहीं, प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक उसे जिला प्रशासन से सुबह 8:40 बजे ही बाढ़ की सूचना मिल गई थी और लोगों को SMS अलर्ट करीब 9:35 बजे भेजा गया।
लोगों को पहले ही मिल गई थी बाढ़ की सूचना
स्थानीय लोगों के मुताबिक, चीन सीमा के पास रहने वाले लोगों और रिश्तेदारों से सुबह 7:30 बजे ही भयंकर बाढ़ की जानकारी मिलने लगी थी। त्रिशूली निवासी रमेश रिजाल ने बताया कि उनके एक दोस्त ने फोन कर उन्हें बाढ़ के खतरे के बारे में बताया था। हालांकि शुरुआत में उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया और बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी करते रहे।
बाद में स्थिति तेजी से बिगड़ने पर रिजाल अपने परिवार के साथ सुरक्षित स्थान पर चले गए। इसी दौरान बाढ़ का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि लोगों को संभलने और सुरक्षित स्थान तक पहुंचने का बहुत कम समय मिला।
स्कूल में घंटी बजाकर बच्चों को किया गया सुरक्षित
त्रिभुवन सेकेंडरी को-एजुकेशनल स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी के अनुसार, ऊपरी इलाके से बाढ़ की जानकारी मिलने के बाद स्कूल में लगातार घंटी बजाने के निर्देश दिए गए। स्कूल में करीब 1,600 छात्र पढ़ते हैं।
बाढ़ की रफ्तार इतनी तेज थी कि स्कूल भी देखते ही देखते पानी की चपेट में आ गया। हालांकि समय रहते बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया गया और बाद में हेलिकॉप्टर की मदद से उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
दो मिनट में बदल गया पूरा मंजर
त्रिशूली बाजार में रहने वाले जलेश्वर साहनी ने बताया कि सुबह करीब 9:15 बजे उनके भाई ने फोन कर बड़े पैमाने पर बाढ़ आने की सूचना दी। इसके बाद साहनी अपने परिवार के साथ पहाड़ी इलाके की ओर चले गए।
उन्होंने सुबह 9:36 बजे बाढ़ के पानी की तस्वीर खींची, जिसमें पानी त्रिशूली बाजार की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा था। इसके महज दो मिनट बाद 9:38 बजे ली गई तस्वीर में बाजार का बड़ा हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ चुका था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पानी कितनी तेजी से आगे बढ़ा।
भूकंप जैसे झटकों के बाद बंद हुआ नदी का डेटा सिस्टम
मौसम विभाग के मुताबिक, 26 अगस्त की सुबह नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 4.4 तीव्रता के भूकंप जैसे झटके महसूस किए गए थे। इसके करीब 13 मिनट बाद सुबह 8:50 बजे भोटे कोशी नदी के जलस्तर की जानकारी देने वाला डेटा रिसीविंग सिस्टम काम करना बंद कर गया।
इसके बाद तिब्बत के ल्हेंदे खोला क्षेत्र में पहाड़ का बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ नदी में गिर गया। ल्हेंदे खोला, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है। इसके बाद पानी, मलबे और चट्टानों का तेज बहाव नेपाल की ओर बढ़ा और कई इलाकों में भारी तबाही मच गई।
मौतों और लापता लोगों का आंकड़ा बढ़ा
बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में मृतकों की संख्या 691 तक पहुंच गई है, जबकि 3 हजार से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 275 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। राहत और बचाव अभियान के दौरान अब तक 7,514 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें 163 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
बाढ़ के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि अगर खतरे की जानकारी स्थानीय प्रशासन और आम लोगों तक समय रहते पहुंच जाती, तो क्या इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
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