नई दिल्ली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय के शपथ ग्रहण समारोह में उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब कार्यक्रम के दौरान राज्य गीत ‘तमिल थाई वाज्थु’ को राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के बाद तीसरे स्थान पर रखा गया।
इस बात पर लोगों की भौंहें तन गईं, क्योंकि तमिलनाडु में सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत राज्य गीत के गायन से होती है और समापन राष्ट्रगान के साथ होता है। इससे पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम’ में संशोधन के एक प्रस्ताव को मंजूरी दी थी कि ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बराबर का दर्जा दिया जा सके।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय।
प्रस्तावित संशोधन के तहत राष्ट्रगीत से जुड़े किसी भी अपमान या उसमें बाधा डालने पर वही दंड मिल सकता है, जो वर्तमान में राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के अपमान या उसमें बाधा डालने पर लागू होता है।
‘बनाई गई परंपरा का उल्लंघन’
सरकार बनाने के लिए टीवीके का समर्थन करने वाली सीपीआई ने गीतों को बजाए जाने के क्रम को लेकर कड़ा विरोध जताया है। उसने कहा कि राज्य में सरकारी समारोहों में तमिल थाई वाज्थु को ही सबसे पहला स्थान मिलना चाहिए था। शपथ ग्रहण समारोह के बाद सीपीआई के राज्य सचिव एम. वीरपांडियन ने एक पत्र जारी किया और कहा कि इस क्रम ने तमिलनाडु की पुरानी परंपरा का उल्लंघन किया है, जहां सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत पारंपरिक रूप से ‘तमिल थाई वाज्थु’ से होती है और समापन राष्ट्रगान के साथ होता है।
राजभवन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, तमिलनाडु सरकार द्वारा आयोजित शपथ ग्रहण समारोह के कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ गीत को प्राथमिकता देना और ‘तमिल’ गीत को तीसरे स्थान पर रखना, स्थापित परंपरा का उल्लंघन माना जाएगा। वीरपांडियन ने अपने पत्र में लिखा, तमिलनाडु सरकार को जनता को यह बताना चाहिए कि इस चूक के लिए कौन जिम्मेदार था। तमिलगा वेट्री कझगम को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ‘तमिल थाई वाज्थु’ को प्राथमिकता दी जाए। ऐसी गलती को जारी रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। पत्र में आगे कहा गया, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और प्रोटेम स्पीकर को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कल होने वाले विधानसभा सत्र में सबसे पहले ‘तमिल थाई वाज्थु’ गाया जाए और सत्र के समापन पर राष्ट्रगान बजाया जाए। साथ ही, सभी सरकारी कार्यक्रमों और समारोहों में भी इसी क्रम का पालन हो।
सीपीआई ने लगाया ये आरोप
वीरपांडियन ने आगे आरोप लगाया कि इस मुद्दे के ऐतिहासिक और वैचारिक निहितार्थ हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ही यह तय कर लिया गया था कि ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह गीत एक विशिष्ट देवी को समर्पित था और इसका स्वरूप सांप्रदायिक-धार्मिक था।
उन्होंने आरोप लगाया, “इस संदर्भ में लोक भवन के निर्देशों पर कथित तौर पर लिया गया यह फैसला कि तमिलनाडु सरकार द्वारा आयोजित शपथ ग्रहण समारोह के एजेंडे में ‘वंदे मातरम्’ को पहला स्थान दिया जाए और तमिल प्रार्थना गीत को तीसरे स्थान पर रखा जाए, स्थापित परंपरा का उल्लंघन है।”
टीवीके ने विवाद से खुद को किया अलग
विवाद शुरू होने के तुरंत बाद टीवीके ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया। पार्टी ने दावा किया कि वह तमिल प्रार्थना गीत को तीसरे स्थान पर बजाए जाने से सहमत नहीं है और तमिलनाडु में अपनाई जाने वाली “सामान्य प्रथा” का समर्थन करती है।
मंत्री आधव अर्जुन ने कहा, “‘नीरारूम कदलुदुथा…’ से शुरू होने वाला तमिल प्रार्थना गीत ऐतिहासिक गौरव की सदियों पुरानी विरासत समेटे हुए है। यह गीत ‘यह पूरी दुनिया में फैले…’ की आकांक्षा की निरंतरता के रूप में तमिलनाडु सरकार द्वारा राज्य गान घोषित किया गया था। यही वह गौरवशाली तमिल प्रार्थना गीत है जिसे तमिलनाडु में होने वाले कार्यक्रमों में सबसे पहले बजाया जाता है। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगान बजाया जाता है। यही सामान्य प्रथा है, यही उचित प्रथा है।”
उन्होंने आगे कहा, “तमिलनाडु में तमिलगा वेट्री कझगम के नेतृत्व में बनी नई सरकार का इस पारंपरिक प्रथा को लेकर कोई अलग दृष्टिकोण नहीं है। ऐसे संदर्भ में आज मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह में सबसे पहले वंदे मातरम बजाया गया, फिर राष्ट्रगान और तीसरे नंबर पर तमिल प्रार्थना गीत। यह नई प्रथा तमिलनाडु के लिए उचित नहीं है। अपनी मातृभूमि तमिलनाडु में टीवीके के नेतृत्व में बनी तमिलनाडु सरकार तमिल प्रार्थना गीत को तीसरे नंबर पर बजाए जाने से सहमत नहीं है।”
उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में इवेंट्स की शुरुआत में राज्य गीत और आखिर में राष्ट्रगान बजाया जाएगा। जब हमने इस मामले पर गवर्नर का पक्ष पूछा तो उन्हें बताया गया कि केंद्र सरकार के नए सर्कुलर के अनुसार काम करने की जिम्मेदारी गवर्नर की है।
उन्होंने कहा, “उस जरूरी स्थिति में तीसरे गाने के तौर पर तमिल प्रार्थना गीत बजाया गया। हालांकि, भविष्य में यह नया तरीका नहीं अपनाया जाएगा। इसके बजाय पहले के तरीके के अनुसार इवेंट की शुरुआत में तमिल प्रार्थना गीत बजाया जाएगा और आखिर में राष्ट्रगान बजाया जाएगा!”
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