विदेश: BRICS शिखर सम्मेलन के अंतिम दिन वैश्विक अर्थव्यवस्था, आपसी व्यापार और भुगतान व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। भारत ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल BRICS देशों के बीच किसी एक साझा मुद्रा को लागू करने का प्रस्ताव नहीं है। इसके बजाय सदस्य देश अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में आपसी लेनदेन को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर पर निर्भरता को कम करना, भुगतान प्रक्रिया को आसान बनाना और लेनदेन की लागत घटाना है। BRICS देशों के बीच स्थानीय करेंसी में व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ डिजिटल भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
नई दिल्ली घोषणा में आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख
BRICS बैठक के दौरान नई दिल्ली घोषणा को मंजूरी दी गई। इसमें आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए आतंकियों को मिलने वाली आर्थिक मदद और सुरक्षित ठिकानों पर चिंता जताई गई। सदस्य देशों ने आतंकवाद की फंडिंग रोकने और आतंकियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
घोषणा में पहलगाम आतंकी हमले की भी निंदा की गई। सदस्य देशों के बीच आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने को लेकर सहमति ऐसे समय बनी है, जब पश्चिम एशिया में तनाव सहित कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दे लगातार चर्चा में हैं।
PM मोदी की आज कई देशों के नेताओं से मुलाकात
BRICS सम्मेलन के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदस्य और आमंत्रित देशों के नेताओं के साथ विभिन्न बैठकों में हिस्सा लेंगे। इन द्विपक्षीय मुलाकातों में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, तकनीक, सुरक्षा और क्षेत्रीय परिस्थितियों सहित कई मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है।
समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS के अगले 20 वर्षों के लिए नए एजेंडे और फैसलों को प्रभावी ढंग से लागू करने की व्यवस्था पर जोर दिया। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबरस्पेस, अंतरिक्ष और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने की बात भी कही।
डिजिटल भुगतान और स्थानीय मुद्रा पर बढ़ता जोर
BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने के साथ डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अलग-अलग देशों के भुगतान नेटवर्क को आपस में जोड़ने से सीमा पार लेनदेन आसान हो सकता है।
ऐसी व्यवस्था विकसित होने पर व्यापारिक भुगतान में हर बार डॉलर का इस्तेमाल करने की आवश्यकता कम हो सकती है। हालांकि, अभी BRICS की कोई एक साझा मुद्रा या एकीकृत भुगतान प्रणाली अस्तित्व में नहीं है।
BRICS का विस्तार और बढ़ता आर्थिक प्रभाव
BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत और चीन के समूह के रूप में हुई थी। बाद में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS हुआ। इसके बाद समूह का और विस्तार हुआ और कई नए देशों को सदस्य या भागीदार के रूप में शामिल किया गया।
आज BRICS को दुनिया के प्रमुख आर्थिक और कूटनीतिक मंचों में गिना जाता है। समूह के बढ़ते विस्तार के साथ वैश्विक व्यापार, निवेश, विकासशील देशों की आवाज और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में इसकी भूमिका भी लगातार महत्वपूर्ण हो रही है।
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