नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस व्यवस्था का उद्देश्य युवाओं को बेहतर भविष्य देना था, वही आज की पीढ़ी को निराश कर रही है। उन्होंने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं पर अपने अनुभव, सुझाव और प्रमाण साझा करने की अपील की है।
राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की शुरुआत उन लोगों की बात सुनने से होनी चाहिए, जो रोजाना इसकी कमियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने छात्रों और अभिभावकों से यह भी जानना चाहा कि आखिर किन कारणों से उनका शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा कम हुआ है।
19 सितंबर को इंदौर में होगा छात्रों से संवाद
राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रहे ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का अगला आयोजन 19 सितंबर को मध्य प्रदेश के इंदौर में प्रस्तावित है। इससे पहले कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।
इंदौर में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर अनुमति का मुद्दा भी सामने आया है। कांग्रेस की ओर से प्रशासन के विभिन्न विभागों के स्तर पर कार्यक्रम की अनुमति के लिए प्रक्रिया चल रही है। पार्टी का कहना है कि अनुमति मिले या न मिले, छात्रों से संवाद का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। वहीं प्रशासन की ओर से सुरक्षा और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर निर्णय लेने की बात कही गई है।
महिलाओं की आजादी और शिक्षा पर भी रखी थी बात
पुणे में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने महिलाओं की आजादी और पितृसत्ता के मुद्दे पर विस्तार से अपनी बात रखी थी। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा और आर्थिक पाबंदियों का जिक्र करते हुए शिक्षा, रोजगार, संपत्ति और अपने फैसले लेने की स्वतंत्रता को जरूरी बताया था।
प्रयागराज में रोजगार और सोशल मीडिया का मुद्दा उठाया
प्रयागराज के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने युवाओं के सामने रोजगार की चुनौती और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि युवाओं को शिक्षा हासिल करने के बाद भी रोजगार की गारंटी नहीं मिल रही है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के बीच बढ़ते अंतर को युवाओं के भविष्य के लिए बड़ी चुनौती बताया।
देहरादून में पेपर लीक और भर्ती व्यवस्था पर सवाल
देहरादून में छात्रों के साथ संवाद के दौरान पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी राहुल गांधी ने सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि पेपर लीक जैसी घटनाओं का खामियाजा बड़ी संख्या में ईमानदारी से तैयारी करने वाले युवाओं को भुगतना पड़ता है।
कोटा में छात्रों के तनाव का मुद्दा उठाया
कोटा में छात्रों से बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था से पैदा होने वाले दबाव और तनाव का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि पढ़ाई का माहौल ऐसा होना चाहिए, जिसमें बच्चों पर अनावश्यक दबाव न पड़े और उन्हें मानसिक रूप से सुरक्षित वातावरण मिल सके।
राहुल गांधी का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में बदलाव केवल नीतियां बनाने से नहीं होगा, बल्कि छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की वास्तविक समस्याओं को समझकर समाधान निकालना होगा। इंदौर में होने वाला अगला संवाद इसी मुद्दे पर युवाओं की राय जानने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्यक्रम माना जा रहा है।
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