रावलकोट। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सरकार और सुरक्षाबलों के खिलाफ लोगों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। शुक्रवार को रावलकोट में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पाकिस्तानी सेना की ओर से कथित तौर पर गोलीबारी किए जाने से दो लोगों की मौत हो गई। इससे पहले गुरुवार को हुई हिंसक कार्रवाई में सात प्रदर्शनकारियों की जान चली गई थी। इस तरह दो दिनों के भीतर नौ लोगों की मौत से पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को मटियालमेरा बस टर्मिनल के पास बड़ी संख्या में लोग अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग कर दी। इस घटना में दो लोगों की मौत हो गई। यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने आरोप लगाया है कि सुरक्षाबलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को निशाना बनाया। संगठन के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान भारी मशीनगनों और ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया।
दो दिनों तक अलग-अलग स्थानों पर हुई हिंसक कार्रवाई
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, लगातार दो दिनों तक मटियालमेरा बस टर्मिनल, उमर फारूक चौक और रावलकोट में चल रहे धरनों को निशाना बनाया गया। आरोप है कि सुरक्षाबलों ने गोलीबारी के साथ ड्रोन और बख्तरबंद वाहनों का इस्तेमाल किया। इन घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई है और क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
आंदोलन में अब तक 155 लोगों की मौत का दावा
PoK में 7 जून से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब व्यापक आंदोलन का रूप ले चुका है। गुरुवार और शुक्रवार को हुई घटनाओं के बाद आंदोलन से जुड़ी हिंसा में मरने वालों की संख्या 155 तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। शुरुआत में लोगों ने राजनीतिक अधिकारों और आर्थिक परेशानियों को लेकर आवाज उठाई थी, लेकिन अब प्रदर्शनकारियों की मांगों में पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की वापसी और आंदोलनकारी नेताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग भी शामिल हो गई है।
इन चार प्रमुख मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरे लोग
1. विधानसभा की आरक्षित सीटों पर विवाद
PoK विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं, जिनमें 12 सीटें पाकिस्तान में रहने वाले कश्मीर मूल के लोगों के लिए आरक्षित हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इन सीटों के माध्यम से पाकिस्तान की सरकार स्थानीय राजनीति में हस्तक्षेप करती है। उनका कहना है कि इससे क्षेत्र के वास्तविक निवासियों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित होता है।
2. बिजली की कीमतों को लेकर नाराजगी
मंगला डैम से बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन होने के बावजूद स्थानीय लोगों को महंगी बिजली मिलने की शिकायत है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि क्षेत्र में उत्पादित बिजली का लाभ स्थानीय उपभोक्ताओं को कम कीमत पर मिलना चाहिए।
3. महंगाई और आटे की बढ़ती कीमतें
क्षेत्र में बढ़ती महंगाई और खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतें भी आंदोलन की प्रमुख वजह हैं। स्थानीय लोग सस्ते आटे की उपलब्धता और जरूरी वस्तुओं पर सब्सिडी देने की मांग कर रहे हैं, ताकि आम परिवारों को आर्थिक राहत मिल सके।
4. सेना और सुरक्षाबलों को वापस बुलाने की मांग
प्रदर्शनकारी आंदोलन को नियंत्रित करने के लिए तैनात पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स को वापस बुलाने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं के खिलाफ आतंकवाद निरोधक कानून के तहत दर्ज मुकदमों को समाप्त करने की मांग भी उठाई जा रही है।
PoK में लगातार बढ़ती हिंसा और विरोध प्रदर्शनों ने पाकिस्तान के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। स्थानीय लोगों की मांगों और सुरक्षाबलों की कार्रवाई को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। आने वाले दिनों में सरकार का रुख और आंदोलन की दिशा क्षेत्र के हालात तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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