नई दिल्ली। रक्षाबंधन से जुड़े एक ज्वेलरी विज्ञापन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी बीच टीवी के चर्चित अभिनेता और रामायण में लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले सुनील लहरी ने विज्ञापन के बहिष्कार का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि त्योहार केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी भावनाओं, रिश्तों और संस्कारों से जुड़े होते हैं और इनका सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है।
सुनील लहरी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर वीडियो जारी कर कहा कि रक्षाबंधन जैसे पर्व से लोगों की भावनाएं और पारिवारिक रिश्ते जुड़े हैं। उन्होंने विज्ञापन के बहिष्कार का समर्थन करते हुए कहा कि जिस तरह लोगों ने एकजुट होकर इसका बहिष्कार किया, वह सम्मान के योग्य है।
अभिनेता ने अपने बयान में कहा, “हम सब मर्दों की मर्दानगी नारी की रक्षा करने में है। हम सबको उनका रक्षक होना चाहिए, भक्षक नहीं। वह सम्माननीय हैं, पूजनीय हैं।”
रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर क्यों हुआ विवाद?
विवाद एक ज्वेलरी ब्रांड के रक्षाबंधन विज्ञापन से शुरू हुआ। विज्ञापन में अभिनेत्री कृति सेनन आधुनिक परिधान में नजर आई थीं। सोशल मीडिया यूजर्स के एक वर्ग ने उनके पहनावे को लेकर आपत्ति जताई और कहा कि पारंपरिक त्योहार से जुड़े विज्ञापन में इस तरह का पहनावा उपयुक्त नहीं है।
विवाद बढ़ने के बाद सोशल मीडिया पर विज्ञापन के समर्थन और विरोध में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे भारतीय संस्कृति और त्योहारों की भावनाओं के अनुरूप नहीं बताया, जबकि दूसरे पक्ष ने महिलाओं के पहनावे को उनकी व्यक्तिगत पसंद और स्वतंत्रता से जोड़ते हुए इसका बचाव किया।
कृति सेनन ने भी दी प्रतिक्रिया
विवाद के बीच कृति सेनन ने अपने बयान में कहा कि त्योहारों की भावना केवल कपड़ों से तय नहीं होती। उनके मुताबिक रक्षाबंधन सुरक्षा और आपसी रिश्ते का त्योहार है तथा किसी महिला की संस्कृति और परंपरा के प्रति सम्मान को उसके पहनावे से नहीं मापा जाना चाहिए।
कृति ने महिलाओं के कपड़ों को लेकर होने वाली आलोचनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि आधुनिक और पारंपरिक परिधानों के बीच चुनाव व्यक्तिगत पसंद का विषय है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संस्कृति व्यक्ति के मन और भावनाओं में होती है, केवल उसके कपड़ों में नहीं।
विवाद के बाद विज्ञापन हटाया गया
विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद बढ़ने के बाद संबंधित ब्रांड ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए विज्ञापन को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा दिया। इसके बाद भी इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी रही।
सुनील लहरी के बयान ने इस विवाद को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। उनके मुताबिक त्योहारों और परंपराओं से जुड़े विज्ञापनों में भारतीय संस्कृति और सामाजिक भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।
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