नई दिल्ली। लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद एक बार फिर आंदोलन का रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। उनका कहना है कि लद्दाख की प्रमुख मांगों को लेकर सरकार की ओर से यदि जल्द कोई ठोस और स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलता है, तो 19 से 24 सितंबर के बीच आंदोलन किया जाएगा।
वांगचुक ने कहा कि लद्दाख के प्रतिनिधियों और सरकार के बीच बैठक सकारात्मक माहौल में हुई, लेकिन बातचीत से कोई नया ठोस परिणाम सामने नहीं आया। उनके मुताबिक, पहले लिए गए फैसलों को ही दोहराया गया और लद्दाख की मांगों पर सरकार की ओर से स्पष्ट स्थिति सामने नहीं रखी गई।
उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोगों को सरकार पर भरोसा है और इसी भरोसे के कारण बार-बार बातचीत का रास्ता चुना जा रहा है। हालांकि, अगर यह भरोसा लगातार कमजोर होता रहा तो लोगों में असंतोष बढ़ सकता है।
जमीन और स्थानीय शासन के अधिकारों पर भी चिंता
लद्दाख के नेताओं और सामाजिक संगठनों की प्रमुख चिंताओं में जमीन की सुरक्षा, स्थानीय लोगों के अधिकार और प्रशासन में उनकी भागीदारी शामिल है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि क्षेत्र के संसाधनों और जमीन पर स्थानीय समुदायों के हितों की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
वांगचुक का कहना है कि सरकार को इन मुद्दों पर स्पष्ट और लिखित आश्वासन देना चाहिए, ताकि लद्दाख के लोगों के बीच पैदा हो रही आशंकाओं को दूर किया जा सके।
लेह से कारगिल तक पदयात्रा का भी कार्यक्रम
लद्दाख के मुद्दों को लेकर लेह से कारगिल तक पदयात्रा की तैयारी भी की गई है। वांगचुक ने संकेत दिया कि यदि बातचीत के जरिए समाधान की दिशा में ठोस प्रगति नहीं हुई तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर बैठक को लेकर निराशा जाहिर करते हुए कहा कि सिर्फ बैठकों और आश्वासनों से लद्दाख की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। लोगों को अब स्पष्ट फैसले और जमीन पर कार्रवाई की उम्मीद है।
पहले भी आंदोलन के दौरान बिगड़े थे हालात
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संवैधानिक संरक्षण की मांग को लेकर पिछले वर्ष भी बड़े स्तर पर आंदोलन हुआ था। उस दौरान लेह में प्रदर्शन हिंसक हो गया था, जिसमें कई लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे।
इसके बाद सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्हें जोधपुर भेजा गया और कई महीनों बाद रिहाई हुई।
क्या है लद्दाख की छठी अनुसूची की मांग?
लद्दाख के स्थानीय संगठन लंबे समय से संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष संवैधानिक संरक्षण की मांग कर रहे हैं। इसका उद्देश्य स्थानीय समुदायों की जमीन, संस्कृति, भाषा और पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करना है।
लेह और कारगिल के प्रतिनिधियों का मानना है कि क्षेत्र में विकास परियोजनाओं और बाहरी गतिविधियों के बढ़ने के साथ स्थानीय लोगों के हितों की सुरक्षा के लिए मजबूत संवैधानिक व्यवस्था जरूरी है।
आगे की रणनीति पर नजर
सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के बावजूद यदि मांगों पर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं होता है तो सितंबर में आंदोलन का नया दौर शुरू हो सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में केंद्र सरकार की ओर से दिए जाने वाले आश्वासन और लद्दाख के संगठनों की अगली रणनीति पर सभी की नजर रहेगी।
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