गाजा। युद्ध और लगातार विस्थापन के बीच गाजा में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा के मामले बढ़ते जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की 17 सितंबर को जारी रिपोर्ट में बाल और जबरन विवाह, यौन हिंसा, घरेलू हिंसा और महिलाओं को जरूरी संसाधनों से वंचित किए जाने के मामलों में बढ़ोतरी की जानकारी सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा में दर्ज बाल और जबरन विवाह के मामलों में 123% की वृद्धि हुई है। कुछ मामलों में आर्थिक तंगी और परिवार की असुरक्षा के कारण कम उम्र की लड़कियों की शादी करा दी गई। एक मामले में 14 साल की लड़की की शादी दो बोरी आटे के बदले किए जाने की जानकारी दी गई है।
रेप के बाद आरोपियों से शादी कराने के मामले
UNFPA ने गाजा सिटी और खान यूनिस के विस्थापन शिविरों में रहने वाली 230 महिलाओं से बातचीत के आधार पर बताया कि यौन हिंसा के कई मामले सामने आए हैं। महिलाओं के अनुसार, टेंट, स्कूलों में बने अस्थायी आश्रयों, गलियों और समुद्र किनारे तक में ऐसी घटनाएं हुईं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ मामलों में सामाजिक बदनामी और परिवार की ‘इज्जत’ बचाने के नाम पर यौन हिंसा की पीड़िताओं की शादी आरोपियों या किसी दूसरे व्यक्ति से कराने का दबाव बनाया गया।
एक महिला ने बताया कि स्कूल में रेप की घटना सामने आने के बाद अगले ही दिन उसी जगह शादी और जश्न आयोजित किया गया। उसके मुताबिक, युद्ध से पहले ऐसी घटनाओं की कल्पना करना भी मुश्किल था।
दिव्यांग लड़कियों को भी निशाना बनाए जाने की जानकारी
रिपोर्ट में दिव्यांग महिलाओं और लड़कियों को यौन हिंसा के अधिक जोखिम में बताया गया है। एक मामले में एक दिव्यांग लड़की करीब सात घंटे तक लापता रही। घर लौटने पर वह रो रही थी, लेकिन परिवार ने इसे डर का असर समझा। करीब दो महीने बाद उसके गर्भवती होने का पता चला। बाद में सामने आया कि उसके साथ रेप हुआ था।
एक अन्य मामले में ऐसी 20 वर्षीय महिला के यौन उत्पीड़न की जानकारी दी गई है, जिसे बातों को समझने में परेशानी होती थी।
माता-पिता खोने वाली नाबालिग लड़कियों की शादी
युद्ध में माता-पिता खो चुकी लड़कियों के सामने भी कम उम्र में शादी का खतरा बढ़ा है। रिपोर्ट में एक महिला ने बताया कि उसके परिवार की 14 और 15 साल की दो लड़कियों के माता-पिता युद्ध में मारे गए थे। इसके बाद उनके चाचाओं ने दोनों की शादी करा दी।
महिला के मुताबिक, चाचा उनकी जिम्मेदारी और खर्च उठाने के लिए तैयार नहीं थे। दोनों लड़कियों की शादी उस उम्र में कर दी गई, जब उन्हें शादी और जीवन की जिम्मेदारियों की पूरी समझ भी नहीं थी।
घर के अंदर भी बढ़ी हिंसा
UNFPA की रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं के लिए खतरा केवल सार्वजनिक जगहों तक सीमित नहीं है। युद्ध के दौरान परिवारों के भीतर भी मारपीट, गाली-गलौज और यौन हिंसा की घटनाएं बढ़ने की जानकारी मिली है।
महिलाओं ने घर तबाह होने, बेरोजगारी, गरीबी, लगातार विस्थापन और तनाव को घरेलू हिंसा बढ़ने की प्रमुख परिस्थितियों में गिनाया।
एक महिला ने बताया कि युद्ध से पहले उसका पति उस पर गुस्सा नहीं करता था, लेकिन घर और संपत्ति खोने के बाद उसके व्यवहार में बदलाव आया और वह पत्नी तथा बच्चों पर अपना गुस्सा निकालने लगा।
भीड़भाड़ और निजता की कमी से बढ़ी परेशानी
विस्थापन शिविरों में बड़ी संख्या में लोगों के एक ही टेंट में रहने से महिलाओं की निजता भी खत्म हो गई है। रिपोर्ट में एक महिला के साथ मारपीट और जबरन यौन संबंध बनाए जाने का मामला दर्ज किया गया है।
महिला के मुताबिक, उसके पति ने बच्चों के सामने संबंध बनाने की मांग की। इनकार करने पर उसने उसकी पिटाई की, हाथ तोड़ दिया और आंख पर चोट पहुंचाई। बाद में उसके साथ स्कूल के बाथरूम में भी जबरन संबंध बनाए गए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भीड़भाड़ और निजी स्थान की कमी ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा के जोखिम को बढ़ाया है। हालांकि, वैवाहिक यौन हिंसा को युद्ध के बाद पैदा हुई नई समस्या नहीं माना गया है।
मानवीय मदद पर भी नियंत्रण की शिकायत
खाद्य संकट और जरूरी सामान की कमी के बीच कुछ महिलाओं ने बताया कि उनके पति मानवीय सहायता से मिलने वाली सामग्री और पैसों पर भी नियंत्रण रखते हैं।
एक महिला ने बताया कि उसे फोन पर मिलने वाले राहत से जुड़े संदेश मिटाने पड़ते हैं, क्योंकि उसे डर रहता है कि पति को मदद मिलने की जानकारी होने पर वह उसे और बच्चों को मिलने वाली सहायता रोक सकता है।
कुछ महिलाओं ने यह भी बताया कि परिवार के लिए जरूरी सामान खरीदने के बजाय पति पैसे सिगरेट या नशे पर खर्च कर देते हैं और विरोध करने पर हिंसा करते हैं।
हिंसा झेलने के बाद भी घर लौटने को मजबूर महिलाएं
रिपोर्ट में ऐसी महिलाओं का भी जिक्र है जो हिंसा से बचने के लिए घर छोड़ना चाहती हैं, लेकिन सुरक्षित जगह और आर्थिक सहारे की कमी के कारण ऐसा नहीं कर पातीं।
एक महिला ने बताया कि उसका पति उसे पीटता, गालियां देता और यौन हिंसा करता था। मदद लेने की कोशिश का पता चलने पर पति ने उसे बांधा और बाल पकड़कर घसीटा। गंभीर चोटों के बावजूद महिला बाद में पति के पास लौट गई।
उसने इसकी वजह बताते हुए कहा कि उसके पास जाने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं थी और वह अपने बच्चों से अलग नहीं रह सकती थी।
परिवार के दूसरे सदस्यों से भी हिंसा
UNFPA की बातचीत में महिलाओं ने बताया कि विस्थापन शिविरों में अत्यधिक भीड़ के कारण परिवार के सदस्यों के बीच तनाव भी बढ़ा है। कुछ महिलाओं ने भाइयों द्वारा बहनों को पीटे जाने और बुजुर्ग महिलाओं के साथ मारपीट की घटनाओं की जानकारी दी।
एक महिला ने बताया कि उसके पड़ोस के टेंट में एक व्यक्ति अपनी बुजुर्ग मां को इसलिए पीटता था क्योंकि वह बिस्तर गीला कर देती थीं और डायपर खरीदना परिवार के लिए महंगा था।
यौन हिंसा के मामलों में 61% की बढ़ोतरी
UNFPA के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 के बीच दर्ज यौन हिंसा के मामलों की संख्या जनवरी से मार्च 2026 की तुलना में 61% बढ़ी। इस अवधि में दर्ज लैंगिक हिंसा के मामलों में यौन हिंसा की हिस्सेदारी 2.7% रही, जबकि जनवरी-मार्च में यह 2.1% थी।
इसी अवधि में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ दर्ज कुल लैंगिक हिंसा के मामलों में 27% की बढ़ोतरी हुई।
रिपोर्ट में अप्रैल से जून के दौरान दर्ज मामलों में 32% को महिलाओं को जरूरी संसाधनों और अवसरों से वंचित करने, 30.9% को भावनात्मक हिंसा और 30.5% को शारीरिक हमले से संबंधित बताया गया है।
UNFPA ने यह जानकारी गाजा में काम कर रही 10 संस्थाओं से जुटाई है और विस्थापन शिविरों में महिलाओं के अनुभवों को भी रिपोर्ट में शामिल किया है।
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