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बिना AC घर रहेगा ठंडा! जानिए 300 साल पुरानी कावी फ्लोरिंग का राज

नई दिल्ली। आज की तपती गर्मी में घरों को ठंडा रखने के लिए हम एसी या कूलर का इस्तेमाल करते हैं, जिनसे बिजली का भारी बिल आता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब एसी और कूलर नहीं थे, तब लोग अपने घरों को कैसे ठंडा रखते थे?

दरअसल, हमारे पूर्वजों के पास निर्माण की कई ऐसी शानदार तकनीकें थीं, जो घरों को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखती थीं। केरल की 300 साल पुरानी कावी फ्लोरिंग इन्हीं में से एक है। आज भले ही लोग महंगे इटैलियन मार्बल की ओर भाग रहे हैं, लेकिन कावी फ्लोरिंग घर को ठंडा रखने वाला एक बेहद किफायती, टिकाऊ और इको-फ्रेंडली विकल्प है। आइए, इस खास फ्लोरिंग के बारे में जानें।

क्या होती है कावी फ्लोरिंग?

कावी फ्लोरिंग केरल की एक पारंपरिक तकनीक है, जिसे मुख्य रूप से भारत की भीषण गर्मी से निपटने के लिए डिजाइन किया गया था। जहां आज हम अपने घरों को ठंडा रखने के लिए एयर कंडीशनर और महंगे सिंथेटिक पत्थरों पर निर्भर हैं, वहीं हमारे पूर्वजों ने मिट्टी और प्राकृतिक मिनरल्स से एक ऐसा फर्श तैयार किया था, जो  घर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है।

कावी फ्लोरिंग की खासियत क्या है?

कावी फ्लोरिंग अपनी खूबसूरती और ठंडक के लिए जानी जाती है।

  • कूलिंग इफेक्ट- इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका थर्मल कंफर्ट है। तेज गर्मी में भी यह फर्श पैर रखने पर ठंडा महसूस होता है, जिससे घर के अंदर का तापमान संतुलित रहता है।
  • शीशे जैसी चमक- इसकी फिनिश गहरे लाल रंग की और चमकदार होती है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि समय बीतने और इस्तेमाल के साथ इसकी चमक कम होने के बजाय बढ़ती जाती है।
  • ईको-फ्रेंडली- इसमें न तो सीमेंट का इस्तेमाल होता है और न ही हानिकारक केमिकल्स का। यह पूरी तरह से ईको-फ्रेंडली और टिकाऊ है।
  • सस्ता विकल्प- मार्बल या ग्रेनाइट की तुलना में कावी फ्लोरिंग काफी सस्ती पड़ती है, हालांकि इसके लिए बहुत ही कुशल कारीगरों की जरूरत होती है।

कैसे बनाई जाती है कावी फ्लोरिंग?

कावी फर्श बनाने की प्रक्रिया में किसी मशीन का नहीं, बल्कि कारिकरों के हाथों का जादू चलता है।  इसमें सीमेंट के बजाय चूना, आयरन ऑक्साइड और पानी का एक खास मिश्रण तैयार किया जाता है। कारीगर इस मिश्रण को फर्श पर हाथों से फैलाते हैं और इसे प्राकृतिक रूप से सूखने और जमने के लिए छोड़ दिया जाता है।

जब फर्श सेट हो जाता है, तो असली काम शुरू होता है। कारीगर कई घंटों तक नारियल के तेल का इस्तेमाल करके फर्श को हाथों से रगड़ते हैं। यह तेल न केवल चमक देता है, बल्कि फर्श को सील भी करता है, ताकि उसमें नमी न जाए। यह फर्श दशकों तक चलता है। बस समय-समय पर थोड़ा तेल लगाने से इसकी चमक हमेशा नई जैसी बनी रहती है।

गायब होती कला

गर्मी से बचने का इतना बेहतरीन तरीका होने के बावजूद आज कावी फ्लोरिंग जैसे गायब हो रही है। आज के समय में केवल कुछ ही कारीगर बचे हैं, जिन्हें पांरपरिक तरीके से कावी फ्लोरिंग बनाने की जानकारी है।

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