झारखंड के देवघर में बाबा बैद्यनाथ मंदिर के कपाट सुबह 3:15 बजे खोले गए। पूजा-अर्चना के बाद 4:10 बजे आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू हुए। मंदिर में भक्तों की करीब 4 किलोमीटर लंबी कतार लगी रही। प्रशासन की ओर से भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए।
सावन के चौथे और आखिरी सोमवार पर देशभर के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर, झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम और मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में तड़के से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। बड़ी संख्या में कांवड़िए भी भगवान शिव का जलाभिषेक करने मंदिरों में पहुंचे।
वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में सुबह 4 बजे मंगला आरती के बाद कपाट खोले गए। श्रद्धालुओं को छह द्वारों से प्रवेश दिया गया। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में ड्रोन से निगरानी की गई। सुबह 5 बजे तक करीब 60 हजार और सुबह 7 बजे तक 1.05 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन करने की जानकारी सामने आई।
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में सुबह 2:30 बजे भस्म आरती हुई। बाबा महाकाल का चांदी के त्रिशूल, मुकुट और आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया गया। इसके साथ भांग, चंदन और ड्रायफ्रूट से भी भगवान का श्रृंगार किया गया और भस्म अर्पित की गई।
वहीं, मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में शाम को भगवान की पारंपरिक सवारी निकाली जाएगी। इस दौरान हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा की जाएगी। भोपाल के पास स्थित भोजेश्वर मंदिर में भी भगवान शिव का विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर को करीब छह क्विंटल फूलों से सजाया गया।
सावन के आखिरी सोमवार के चलते दिल्ली, मुंबई, जम्मू, जयपुर और उत्तर प्रदेश के विभिन्न शिव मंदिरों में भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ नजर आई। मंदिरों में हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
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