-अराघची ने क्षेत्रीय नेताओं से की हस्तक्षेप की अपील, ट्रम्प बोले- समझौते को देंगे प्राथमिकता
वॉशिंगटन डीसी/तेहरान/तेल अवीव। ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को कड़ा संदेश देते हुए चेतावनी दी है कि यदि उसके ऊर्जा ढांचे पर दोबारा हमला किया गया तो वह पूरे खाड़ी क्षेत्र के तेल ठिकानों, रिफाइनरियों, बिजली ग्रिड और अन्य महत्वपूर्ण ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा। इस बयान के बाद मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है।
रिपोर्टों के अनुसार ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सऊदी अरब, कतर, तुर्किये और पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं से संपर्क कर अमेरिका पर सैन्य कार्रवाई टालने के लिए दबाव बनाने की अपील की है। ईरान का कहना है कि वह कूटनीतिक समाधान का पक्षधर है, लेकिन किसी भी नए हमले का पहले से अधिक कड़ा जवाब दिया जाएगा।
इस बीच सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से बातचीत कर सैन्य कार्रवाई से बचने और वार्ता जारी रखने का आग्रह किया है। दूसरी ओर ट्रम्प ने भी संकेत दिए हैं कि अमेरिका बातचीत के जरिए समाधान चाहता है और अगले 48 घंटों में स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
उधर ईरान और ओमान के बीच होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर नए समुद्री मार्ग पर सहमति बनने की खबर है। हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता क्षेत्र से खतरे के पूरी तरह समाप्त होने का संकेत नहीं है और अमेरिकी सैन्य दबाव जारी रहने पर सुरक्षा जोखिम बना रहेगा।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान के साथ हालिया संघर्ष के दौरान अमेरिका ने अपने THAAD मिसाइल रक्षा प्रणाली के लगभग 80 प्रतिशत तथा पैट्रियट सिस्टम के करीब आधे इंटरसेप्टर का उपयोग किया। वहीं संयुक्त राष्ट्र के अनुसार लेबनान में संघर्ष कम होने के बाद 8.21 लाख से अधिक विस्थापित लोग अपने घर लौट चुके हैं, जबकि लाखों लोग अब भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर किसी भी प्रकार का टकराव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार पर व्यापक असर डाल सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
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