उत्तर प्रदेश के सबसे महंगे एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। उद्घाटन के महज 18 दिनों के भीतर एक्सप्रेसवे पर 84 स्थानों पर सड़क धंसने और क्षतिग्रस्त होने का दावा सामने आया है। लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद यात्रियों की सुरक्षा और निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं। हाल के दिनों में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने भी एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में खराब निर्माण को लेकर कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी पर सख्त रुख अपनाया है।
यह एक्सप्रेसवे अपनी आधुनिक सुविधाओं और ऊंची निर्माण लागत के कारण चर्चा में रहा था। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इसे विश्वस्तरीय मानकों वाला प्रोजेक्ट बताया था। हालांकि लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियों ने इसकी गुणवत्ता पर बहस तेज कर दी है। मामले में निर्माण कार्य, निगरानी व्यवस्था और ठेका प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सरकार और संबंधित एजेंसियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।
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