पंजाब में भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। यदि दोनों दल आगामी विधानसभा चुनाव में साथ आते हैं, तो कई सीटों पर चुनावी मुकाबले की तस्वीर बदल सकती है। 2024 लोकसभा चुनाव के विधानसभा-वार आंकड़ों के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि दोनों दलों के वोटों को जोड़ने पर करीब 21 विधानसभा क्षेत्रों में उनका संयुक्त मत कांग्रेस या आम आदमी पार्टी से अधिक रहा था।
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 23 विधानसभा क्षेत्रों में सबसे अधिक वोट हासिल किए थे, जबकि अकाली दल नौ क्षेत्रों में आगे रहा। यानी अलग-अलग चुनाव लड़ने के बावजूद दोनों दलों ने 32 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त दर्ज की थी। ऐसे में यदि दोनों दल एक साथ चुनाव मैदान में उतरते हैं तो उनके पारंपरिक वोट बैंक का असर कई सीटों पर दिखाई दे सकता है।
शहरी और ग्रामीण वोट बैंक का मेल
भाजपा का प्रभाव मुख्य रूप से शहरी और व्यापारी वर्ग में माना जाता है, जबकि अकाली दल की पकड़ ग्रामीण पंजाब, खासकर मालवा और पंथक क्षेत्रों में रही है। दोनों दलों के समर्थन आधार का मेल होने पर कई सीटों पर मुकाबला बेहद कड़ा हो सकता है।
खरड़ विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और अकाली दल के संयुक्त 58,045 वोट कांग्रेस के 46,622 वोट से 11,423 अधिक रहे। मानसा में दोनों दलों को मिलाकर 57,918 वोट मिले, जो आम आदमी पार्टी के 48,008 वोट से 9,910 अधिक थे। समाना में भी दोनों दलों के संयुक्त 44,258 वोट आम आदमी पार्टी के 36,141 वोट से आगे रहे।
पटियाला ग्रामीण में भाजपा-अकाली दल के संयुक्त 45,502 वोट आम आदमी पार्टी के 37,446 वोट से 8,056 अधिक थे। मौर में दोनों दलों को 43,237 वोट मिले, जबकि आम आदमी पार्टी को 35,211 वोट मिले। अमृतसर पश्चिम में संयुक्त वोट 42,388 रहा, जो कांग्रेस के 35,012 वोट से 7,376 अधिक था। फगवाड़ा में भी दोनों दलों के 37,000 संयुक्त वोट आम आदमी पार्टी के 30,349 वोट से अधिक रहे।
कई सीटों पर करीबी मुकाबले का संकेत
अटारी में भाजपा और अकाली दल के संयुक्त 37,897 वोट कांग्रेस के 32,479 वोट से 5,418 अधिक रहे। नाभा में दोनों दलों के 40,543 वोट कांग्रेस के 36,230 वोट से आगे थे। साहनेवाल में संयुक्त 60,797 वोट कांग्रेस के 55,541 वोट से 5,256 अधिक रहे।
बलाचौर में दोनों दलों के संयुक्त 29,472 वोट कांग्रेस के 22,684 वोट से अधिक थे। आनंदपुर साहिब में संयुक्त वोट 42,808 रहा, जबकि आम आदमी पार्टी को 39,898 वोट मिले। दीनानगर में अंतर बेहद कम रहा, जहां भाजपा-अकाली दल के संयुक्त 45,919 वोट कांग्रेस के 45,319 वोट से केवल 600 अधिक थे।
बठिंडा शहर, लंबी, भुच्चो मंडी, बठिंडा ग्रामीण और बुढलाडा जैसे मालवा क्षेत्र भी संभावित गठबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा सकते हैं।
सिर्फ वोटों का जोड़ जीत की गारंटी नहीं
हालांकि 2024 के आंकड़ों को सीधे 2027 विधानसभा चुनाव का परिणाम मानना सही नहीं होगा। चुनाव में उम्मीदवार की लोकप्रियता, स्थानीय नेतृत्व, संगठन की ताकत और मतदाताओं की पसंद अहम भूमिका निभाएगी। किसान, पंथक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों के साथ-साथ शहरी विकास और सत्ता विरोधी रुझान भी चुनावी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा के शहरी मतदाता और अकाली दल का ग्रामीण वोट बैंक एक ही उम्मीदवार के पक्ष में पूरी तरह एकजुट हो पाएगा। अगर ऐसा हुआ तो पंजाब की कई विधानसभा सीटों पर चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प और कड़ा हो सकता है।
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