Breaking News

3 साल में 12 मौतें और 125 घायल… आखिर क्यों गिर रहे हैं मुंबई के पेड़?

नई दिल्ली। मुंबई के खार इलाके में 10 मई को एक पेड़ गिरने से दो कम उम्र की लड़कियां गंभीर रूप से घायल हो गईं। इस हादसे के ठीक एक दिन बाद बृहन्मुंबई नगर निगम के एच-वेस्ट वार्ड कार्यालय द्वारा खार पुलिस को लिखे गए एक पत्र ने शहर में एक बार फिर इस गंभीर सवाल को हवा दे दी है। आखिर मुंबई के पेड़ों की जान कौन ले रहा है?

इस पत्र के अनुसार, गिरा हुआ पेड़ अपनी जड़ों के आसपास निर्माण कार्य का मलबा डंप किए जाने के कारण कमजोर हुआ था, जिससे वह सड़क की तरफ झुक गया और आखिरकार एक ऑटो रिक्शा पर जा गिरा। दूसरी तरफ, जिस कंस्ट्रक्शन साइट से यह पेड़ गिरा उसके डेवलपर ने मलबे की बात से इनकार करते हुए दावा किया कि पेड़ के अंदरूनी हिस्से में दीमक लगी थी, जो बाहर से दिखाई नहीं दे रही थी। भले ही दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलों पर अड़े हों, लेकिन आंकड़े बेहद डरावने हैं। आंकड़ों के मुताबिक, मई 2023 से मई 2026 के बीच मुंबई में पेड़ गिरने की घटनाओं में 125 लोग घायल हो चुके हैं, जबकि 12 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। विशेषज्ञ और स्थानीय निवासी इसे केवल एक हादसे के रूप में नहीं, बल्कि पूरी मुंबई में फैल चुकी एक गंभीर और व्यवस्थागत समस्या के रूप में देख रहे हैं।

News Article Hero Image

घुट रहा है पेड़ों का दम

दादर पारसी कॉलोनी के निवासी बुर्गिस बलसारा ने बताया कि वह निर्माण कार्य के मलबे के नीचे पेड़ों को दबाए जाने की शिकायतों को लेकर लगातार बीएमसी के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फाइव गार्डन्स के पास वीजेटीआई लेन में चल रहे सड़क और फुटपाथ के कंक्रीटीकरण के दौरान ठेकेदारों ने पेड़ों के थालों को सीमेंट और मलबे से भर दिया है। बलसारा के अनुसार, “सड़क के काम के बाद कचरा साफ करने के बजाय, उन्होंने ताजा मलबा पेड़ों की जड़ों के पास डाल दिया। जब सड़क की तराई की जाती है, तो पानी इस मलबे के साथ मिलकर जड़ों के चारों तरफ सीमेंट को कड़ा कर देता है। यह पेड़ों को धीरे-धीरे घोंटकर मारने जैसा है।”

जब इस संबंध में एफ-नॉर्थ वार्ड के सड़क विभाग के अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर कठोर कार्रवाई की जाती है। इस मामले में भी ठेकेदार पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया गया है। हालांकि, अधिकारी का दावा है कि मलबे का भरा जाना जानबूझकर नहीं था और इसे तुरंत साफ करने के निर्देश दे दिए गए हैं, जिससे जड़ों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।

कंक्रीटीकरण की अंधी दौड़ से पर्यावरण को नुकसान

मुंबई को गड्ढा मुक्त बनाने के लिए जनवरी 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए बीएमसी के महत्वाकांक्षी सड़क कंक्रीटीकरण प्रोजेक्ट के तहत 709.59 किलोमीटर लंबी 2,164 सड़कों का कंक्रीटीकरण किया जाना है। इसमें से बीएमसी अब तक 400 किलोमीटर लंबी 1,427 सड़कों का काम पूरा कर चुकी है, जबकि 150 किलोमीटर लंबी 431 सड़कों का काम आंशिक रूप से पूरा हो चुका है।

पेड़ों के विशेषज्ञों का कहना है कि सड़कों को बेहतर बनाने की इस आक्रामक होड़ में फुटपाथ और सड़कों के नीचे फैले पेड़ों के रूट सिस्टम की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है। पर्यावरण विशेषज्ञ वैभव राजे ने कहा कि शहरी पेड़ों को जीवित प्रणालियों के बजाय केवल सतह पर रखी वस्तु मान लिया गया है। आप किसी पेड़ के चारों ओर एक बड़े हिस्से को कंक्रीट से ढककर यह उम्मीद नहीं कर सकते कि वह भीषण गर्मी, मिट्टी के संघनन और ऑक्सीजन की कमी के बीच भी जीवित रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे पेड़ अंदर से कमजोर हो जाते हैं और भारी बारिश, तेज हवा या अत्यधिक गर्मी के दौरान अचानक गिर जाते हैं।

समय पर छंटाई की मांग

पाली हिल रेजिडेंट्स एसोसिएशन की मधु पोपलई ने बताया कि यह समस्या अब केवल मुख्य सड़कों तक सीमित नहीं रही है। पाली हिल जैसी घनी हरियाली वाली संकरी गलियों का भी कंक्रीटीकरण किया जा रहा है, जिससे वहां की प्राकृतिक मिट्टी की संरचना हमेशा के लिए बदल रही है। उन्होंने कहा कि वे मानसून का इंतजार किए बिना साल भर नियमित रूप से पेड़ों की छंटाई करवाते हैं ताकि आपातकालीन स्थिति से बचा जा सके। वहीं, बीएमसी की बाजार एवं उद्यान समिति की अध्यक्ष हेतल गाला ने नागरिक अधिकारियों से मांग की है कि सार्वजनिक सड़कों पर फैले हुए पेड़ों की टहनियों को तुरंत काटा जाए और खतरनाक हो चुके पेड़ों की पहचान की जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना या मौत को रोका जा सके।

भीषण गर्मी भी बड़ी वजह

तमाम आरोपों के बीच, बीएमसी के उद्यान विभाग ने आंतरिक रूप से एक संदेश जारी कर बढ़ती गर्मी को भी पेड़ों के गिरने के पीछे एक बड़ा कारण बताया है। मुंबई के कुछ हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच रहा है। बीएमसी का कहना है कि अत्यधिक गर्मी के कारण मिट्टी सूख जाती है, जिससे पेड़ों की जड़ें सिकुड़ जाती हैं और जमीन पर उनकी पकड़ कमजोर हो जाती है। इसके अलावा, तेज गर्मी से टहनियां सूखकर इतनी नाजुक हो जाती हैं कि बिना तेज हवा के भी अचानक टूटकर गिरने लगती हैं। बीएमसी ने अब कमजोर पेड़ों में लक्षित पानी डालने की शुरुआत की है और स्थानीय नागरिकों से भी इस हरियाली को बचाने में सहयोग की अपील की है।

About NW-Editor

Check Also

मुंब्रा: एमआईएम पार्टी के नेताओं ने हाकिम अजमल खान अस्पताल का निरीक्षण कर मरीजों का हाल जाना,

मुंब्रा में एमआईएम पार्टी के वार्ड नंबर 26 के नगरसेवक सैफ़ पठान और उनकी टीम …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *