वॉशिंगटन। अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने रूसी डीजल की खरीद पर लगी रोक में अस्थायी छूट देने का फैसला किया है। इस कदम का उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की आपूर्ति बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना बताया जा रहा है। हालांकि, इस फैसले ने अमेरिका की रूस नीति और यूक्रेन युद्ध को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
अमेरिका में डीजल की कीमतें बढ़ने से परिवहन, कृषि और दूसरे उद्योगों पर दबाव बढ़ा है। खबर में दी गई जानकारी के मुताबिक, डीजल की कीमत करीब 6.28 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जबकि ईरान युद्ध से पहले यह लगभग 3.70 डॉलर प्रति गैलन थी। ऐसे में अमेरिकी प्रशासन ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के विकल्प तलाश रहा है।
रूस से डीजल खरीदने की योजना
ट्रम्प ने दावा किया है कि रूस से बड़ी मात्रा में डीजल की आपूर्ति की जाएगी। इसके तहत शुरुआती खेप में तीन लाख टन से अधिक डीजल भेजे जाने की बात कही गई है। इसके बाद नवंबर में पांच लाख टन और आगे अतिरिक्त आपूर्ति की योजना का भी जिक्र किया गया है।
अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि ईंधन की आपूर्ति बढ़ने से घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इस फैसले के प्रभाव को लेकर संदेह जताया है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें केवल आपूर्ति ही नहीं, बल्कि युद्ध, परिवहन लागत और वैश्विक मांग से भी प्रभावित होती हैं।
यूक्रेन ने जताई नाराजगी, युद्ध को मिल सकती है आर्थिक ताकत
रूस से डीजल खरीदने की योजना पर यूक्रेन ने कड़ी आपत्ति जताई है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की का कहना है कि रूस को ऊर्जा कारोबार से मिलने वाला पैसा यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध में इस्तेमाल हो सकता है।
यूक्रेन का तर्क है कि रूस के साथ ऊर्जा व्यापार बढ़ने से उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है और युद्ध लंबा खिंचने का खतरा बढ़ सकता है। यह मुद्दा ऐसे समय उठा है, जब युद्ध समाप्त कराने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं।
भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ की धमकी क्यों चर्चा में?
इस फैसले के बीच भारत और चीन पर अमेरिकी टैरिफ की धमकी भी चर्चा में है। खबर में उल्लेख किया गया है कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने की संभावना से जुड़ा कानून अमेरिकी प्रशासन की नीति का हिस्सा है।
भारत के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, क्योंकि रूस लंबे समय से उसकी प्रमुख कच्चे तेल आपूर्ति के स्रोतों में शामिल रहा है। हालांकि, रूसी डीजल खरीद पर अमेरिका की अस्थायी छूट और भारत पर संभावित टैरिफ दो अलग-अलग नीतिगत विषय हैं। इनके वास्तविक प्रभाव का आकलन संबंधित सरकारी फैसलों और लागू शर्तों के आधार पर ही किया जा सकता है।
विशेषज्ञों को कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से डीजल खरीदने के फैसले का अमेरिकी बाजार पर असर सीमित रह सकता है। वैश्विक ईंधन बाजार में आपूर्ति के स्रोत बदलने से व्यापार का संतुलन प्रभावित हो सकता है, लेकिन इससे कुल कीमतों में तत्काल बड़ी गिरावट की गारंटी नहीं मिलती।
अमेरिका में आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले ईंधन की कीमतें राजनीतिक रूप से भी अहम मुद्दा बनी हुई हैं। ऐसे में ट्रम्प प्रशासन के सामने घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने और रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ी अपनी विदेश नीति के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।
निष्कर्ष: रूस से डीजल खरीदने की अमेरिकी योजना ने वैश्विक ऊर्जा बाजार, यूक्रेन युद्ध और भारत पर संभावित व्यापारिक दबाव को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। हालांकि, कीमतों में कितनी राहत मिलेगी और टैरिफ संबंधी धमकी का आगे क्या असर होगा, यह आने वाले फैसलों पर निर्भर करेगा।
News Wani
