छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में शुरू किया गया ‘कैफे पंडुम’ अब केवल एक कैफे नहीं, बल्कि बदलाव, पुनर्वास और नई उम्मीद की पहचान बन चुका है। कभी हिंसा और नक्सल गतिविधियों से जुड़े रहे कई लोगों को यहां रोजगार, सम्मान और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।
कैफे पंडुम में काम करने वाले पूर्व नक्सली अब अपने अतीत को पीछे छोड़कर आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रहे हैं। यहां उन्हें आतिथ्य, खाद्य सेवा और ग्राहक प्रबंधन जैसे कार्यों का प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे वे अपनी मेहनत के दम पर नई पहचान बना रहे हैं।
इस पहल का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि यह संदेश देना भी है कि यदि अवसर और विश्वास मिले तो कोई भी व्यक्ति अपनी जिंदगी बदल सकता है। कैफे में आने वाले पर्यटक भी स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक व्यंजनों और बस्तर की विरासत से रूबरू होते हैं, जिससे स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है।
सरकार और प्रशासन की इस पुनर्वास पहल को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे प्रयास न केवल हिंसा की राह छोड़ चुके लोगों के भविष्य को सुरक्षित बनाते हैं, बल्कि क्षेत्र में शांति, विकास और सामाजिक विश्वास को भी मजबूत करते हैं।
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