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पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन पर कांग्रेस ने उठाई आवाज

फतेहपुर उत्तर प्रदेश के प्रदेश उपाध्यक्ष अल्पसंख्यक विभाग कांगेस मिसबाउलहल ने आज फतेहपुर जिले में बैठक करते हुवे बताया कि आने वाले पंचायत और ग्रामपंचायत चुनाव में आबादी के अनुसार चुनाव आयोग सीट का करे निर्धारण जिसको लेकर बीते दिनों राजधानी दिल्ली में मुस्लिम प्रतिनिधित्व और परिसीमन के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से आए शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, अधिवक्ताओं,पत्रकारों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया सच्चर समिति की सिफारिशों के अनुरूप की जानी चाहिए, ताकि सभी समुदायों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल सके।अल्पसंख्यक समाज का प्रतिनिधित्व करते हुवे जिलाध्यक्ष मिस बाउल हक का कहना था कि वर्तमान परिसीमन व्यवस्था के कारण कई क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व प्रभावित हुआ है। उन्होंने मांग की कि परिसीमन आयोग सामाजिक और जनसंख्या संबंधी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए नई सीमाएं निर्धारित करे। साथ ही, यह भी कहा गया कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सभी वर्गों की समान भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है।

संवाद के दौरान मिस बाउल हक ने सच्चर समिति की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि समिति ने मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे। इन सिफारिशों को लागू करने के साथ-साथ राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
कार्यक्रम में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि परिसीमन के दौरान जनसंख्या के आधार पर विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों का पुनर्गठन किया जाए तथा अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों को अनावश्यक रूप से विभाजित न किया जाए। इसके अलावा राजनीतिक दलों से मुस्लिम समुदाय को अधिक टिकट देने और लोकतांत्रिक संस्थाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाने की अपील की गई।

कार्यक्रम के अंत में सात सूत्रीय मांगपत्र जारी किया गया, जिसमें सच्चर समिति की सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू करने, निष्पक्ष परिसीमन कराने तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं में सभी समुदायों की समान भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की गई। उपस्थित लोगों ने कहा कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत बनाने के लिए समावेशी प्रतिनिधित्व समय की आवश्यकता है।

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