मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई अहम योजनाओं और फैसलों की घोषणा की है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने कहा कि प्रदेश के विकास की आधारशिला किसान हैं और उनकी समृद्धि के बिना आर्थिक प्रगति संभव नहीं है। इसी उद्देश्य से राज्य में ‘किसान कल्याण वर्ष’ के तहत नई पहलें लागू की जा रही हैं।
क्या हैं प्रमुख घोषणाएं: सरकार ने इस वर्ष गेहूं खरीदी का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। यह वृद्धि किसानों की उपज को बेहतर मूल्य दिलाने और उनकी आय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए स्लॉट बुकिंग की अवधि 30 अप्रैल से बढ़ाकर 9 मई कर दी गई है, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।
किसानों को कैसे मिलेगा फायदा: राज्य सरकार ने दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए भी कदम उठाए हैं। उड़द की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जाएगी, साथ ही किसानों को 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस भी दिया जाएगा। सरसों के लिए भावांतर योजना लागू करने से बाजार में बेहतर दाम मिलने लगे हैं।
बिजली और सिंचाई पर फोकस: सरकार ने किसानों को सस्ती और सुगम बिजली उपलब्ध कराने के लिए नई योजनाएं शुरू की हैं। किसानों को मात्र 5 रुपये में कृषि पंप कनेक्शन देने की पहल की गई है। वहीं ‘कृषक मित्र योजना’ के तहत 90 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर पंप दिए जा रहे हैं, जिससे किसान ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
भू-अर्जन और मुआवजा नीति: भूमि अधिग्रहण के मामलों में भी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब किसानों को उनकी जमीन के बदले चार गुना तक मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है। यह कदम किसानों के अधिकारों की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
क्यों है यह योजना अहम: इन योजनाओं से किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि उत्पादन में भी वृद्धि होगी। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से खेती अधिक लाभकारी बनने की संभावना है।
डेयरी और उर्वरक क्षेत्र में पहल: सरकार प्रदेश को ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। अब तक 1752 नई दुग्ध समितियों का गठन किया जा चुका है और प्रतिदिन 10 लाख किलोग्राम से अधिक दूध संकलन हो रहा है। किसानों को 1600 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान भी किया गया है।
उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त भंडारण किया गया है और वितरण प्रणाली को डिजिटल बनाया जा रहा है, जिससे किसानों को आसानी से खाद मिल सके। सरकार का लक्ष्य कृषि क्षेत्र में नवाचार और तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि इन योजनाओं से प्रदेश के किसान आत्मनिर्भर बनेंगे और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य में अहम भूमिका निभाएंगे।
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