नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों में जारी उठापटक और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। भारतीय वायदा बाजार में बुधवार को सोने के भाव लगातार सातवें कारोबारी सत्र में कमजोर हुए। एमसीएक्स पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना गिरकर करीब ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया।
बाजार में सोने की कीमतों में आई इस गिरावट के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को प्रमुख वजह माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े हैं। इससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की आशंका मजबूत हुई है।
एमसीएक्स पर सोना 1 फीसदी से ज्यादा टूटा
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर बुधवार को अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना 1,559 रुपये यानी 1.03 फीसदी गिरकर 1,50,170 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इससे पहले इसका भाव 1,51,729 रुपये प्रति 10 ग्राम था।
इसी तरह दिसंबर डिलीवरी वाले सोने का भाव भी 1,753 रुपये यानी 1.14 फीसदी गिरकर 1,51,540 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। पिछले कारोबारी सत्र में दिसंबर अनुबंध का भाव 1,53,293 रुपये प्रति 10 ग्राम था।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने पर दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। न्यूयॉर्क के कॉमेक्स बाजार में दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 46.46 डॉलर यानी 1.06 फीसदी गिरकर 4,349.94 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र रहा, जब कॉमेक्स पर सोने में गिरावट दर्ज की गई।
कच्चे तेल की तेजी ने बदला बाजार का रुख
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। बाजार में आशंका है कि महंगे ईंधन से वैश्विक महंगाई और बढ़ सकती है। ऐसे में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकते हैं।
ब्याज दरों में बढ़ोतरी या लंबे समय तक ऊंची दरों की संभावना सोने के लिए दबाव वाली स्थिति पैदा करती है, क्योंकि सोने से नियमित ब्याज आय नहीं होती। ऐसे माहौल में निवेशकों का रुख ब्याज देने वाली परिसंपत्तियों की ओर बढ़ सकता है।
निवेशकों की नजर अब अमेरिकी रोजगार आंकड़ों पर
बाजार की नजर अब अमेरिका के आगामी रोजगार आंकड़ों और महंगाई से जुड़े संकेतकों पर है। इन आंकड़ों से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
निवेशक यह आकलन कर रहे हैं कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से पैदा होने वाली महंगाई का असर अमेरिकी केंद्रीय बैंक के ब्याज दर संबंधी फैसले पर कितना पड़ेगा। फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सोने की कीमतों पर फिलहाल दबाव
भू-राजनीतिक तनाव के समय आमतौर पर सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार बढ़ती तेल कीमतों और ब्याज दरों को लेकर बनी चिंताओं ने इस पर दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में सोने की कीमतों में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है।
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