लखनऊ। सरकारी भर्तियों में आरक्षण व्यवस्था को लेकर बुधवार को लखनऊ में अभ्यर्थियों और प्रदर्शनकारियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। चारबाग रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण व्यवस्था को पारदर्शी तरीके से लागू करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारी हाथों में तिरंगा लेकर नारेबाजी करते हुए विधानसभा की ओर पैदल मार्च के लिए निकल पड़े।
पदयात्रा के दौरान प्रदर्शनकारी करीब 500 मीटर तक पहुंचे। हरबिलास अस्पताल के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। विधानसभा की ओर जाने की जिद पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की होने लगी। करीब एक घंटे तक मौके पर हंगामा और प्रदर्शन चलता रहा।
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाने की कार्रवाई शुरू की। इस दौरान प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे आरएस पटेल समेत कई लोगों को पुलिसकर्मियों ने उठाकर मौके से हटाया। पुलिस कार्रवाई के दौरान समर्थकों और पुलिस के बीच काफी देर तक खींचतान होती रही।
प्रयागराज से शुरू हुई थी पदयात्रा
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक आरक्षण के मुद्दे को लेकर पदयात्रा 26 अगस्त को प्रयागराज स्थित इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शुरू हुई थी। इसके बाद यह यात्रा कौशाम्बी, फतेहपुर और रायबरेली होते हुए लखनऊ पहुंची। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि सरकारी भर्तियों में आरक्षण के नियमों के पालन में कई स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं।
प्रदर्शनकारियों ने UPSSSC, 68,500 शिक्षक भर्ती, 69 हजार शिक्षक भर्ती, पशुपालन विभाग, चिकित्सा विभाग और लेखपाल भर्ती समेत 22 भर्तियों में आरक्षण से जुड़ी कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया। उनका आरोप है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के पात्र अभ्यर्थियों को आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
आरक्षण रोस्टर सार्वजनिक करने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने सरकारी भर्तियों में आरक्षण व्यवस्था को स्पष्ट और पारदर्शी बनाने की मांग की। उनका कहना है कि विभागवार और श्रेणीवार पदों की स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में आरक्षण के वास्तविक क्रियान्वयन की जानकारी मिल सके।
प्रमुख मांगों में आरक्षण रोस्टर सार्वजनिक करना, विभागवार और श्रेणीवार पदों का स्पष्ट विवरण जारी करना, आरक्षण की निगरानी के लिए बोर्ड का गठन करना तथा भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र निगरानी और सामाजिक ऑडिट कराना शामिल है।
इसके अलावा आरक्षण से जुड़ी शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए प्रभावी कानून बनाने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आरक्षण व्यवस्था संविधान में निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप पारदर्शी तरीके से लागू होनी चाहिए, ताकि पात्र अभ्यर्थियों को उनका अधिकार मिल सके।
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