महोबा। चरखारी कस्बे के मोहल्ला मड़वासन में मदरसा मुहम्मदिया अरबिया में करीब कुछ दिन पहले आयोजित बैठक में उलेमाओं हाफिज और मौलानाओं ने तीजा और चालीसवां की फातिहा पर आने वाले आम लोगों को खाना खिलाए जाने की परंपरा को बंद करने के मुद्दा जिले में चर्चा का विषय बना हुआ साथ ही इस फैसले की सराहना भी की जा रही है। जिसको लेकर शहर के एक प्रतिनिधि मंडल ने इस पहल की अगुवाई करने वाले अहले सुन्नत उलेमाओं मौलानाओं और हाफिजों का फूलमाला पहचनाकर स्वागत किया साथ ही 23 सितंबर को महोबा में आयोजित होेने वाली बैठक का भ आमंत्रण दिया।
कस्बा चरखारी के हफिज आबिद हुसैन सहित अहले सुन्नत उलेमा मौलानाओं और हफिजों ने 9 सितम्बर को बैठक करते हुए तीजा, चालीसवां (मृत्युभोज) को पूरी तरह से रोकने की सहमति बनाई गयी थी, जिसके बाद से चालीसवें फातिहा के बाद खाने से सभी ने दूरी बनाई। चरखारी में मृत्युभोज बंद होने की सराहना पूरे क्षेत्र में हुई और अब जिला मुख्यायल के आलिमों व आवाम ने भी इस दिशा में काम करने का फैसला लिया है साथ ही अधिवक्ता निहाल अहमद, अधिवक्ता मुकीत खान, सभासद असफाक, अकरम, फजल, कलीमउल्ला खां, सभासद आमिर, शमीम खां, अबरार खां, दिलशाद नम्बरदार आदि ने हफिज आबिद हुसैन, मौलाना दानिश, मदनी इमरान का फूल मालाओं से स्वागत किया और चरखारी में हुई पहल की सराहना की।
एडवोकेट निहाल अहमद ने कहा कि शहर के मौलाना जमालुद्दीन साहब की निर्देश पर चरखारी टीम का सम्मान करने आयी है। साथ ही 23 सितम्बर को मकनयापुरा जामा मस्जिद में आयोजित बैठक के लिए आमंत्रण दिया। कहा कि आज नाम और शोहरत के लिए सैकड़ों लोगों को खाना खिलाया जाता है जिससे कमजोर वर्ग के लोग तानाकशी से बचने के लिए कर्जा लेकर भी दावत देते हैं जो इस्लिामिक तौर पर गलत है। सभासद असफाक ने कहा कि मृत्युभोज पर रोक की जो पहल चरखारी में हुई है उसकी तमाम जिले में सराहना हुई है और एक नजीर बनी है। चालीसवां का खाना एक सदका है जो कि गरीबों के लिए है अमीर और दौलतमंद को इससे बचना चाहिए। इस मौके पर सदर मोहम्मदिया अरबिया मोहम्मद सईद सौदागर, रमजान सौदागर, रमजान राईन, मोहम्मद हनीफ, निहाल खान, नईम खां, गफ्फार खां उर्फ कल्लन, शरीफ खां, एहतेशाम अहमद खां सहित समाज के अन्य लोग मौजूद रहे।

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