महोबा। विश्व के निर्माता भगवान विश्वकर्मा जयंती पूरे जिले में धूमधाम के साथ मनाई गई। गुरूवार को जयंती के मौके पर शहर के प्राचीन बड़ी चंद्रिका देवी मंदिर परिसर से बाइक जुलूस और शोभा यात्रा निकाली गई, जो निर्धारित मार्गों से होते हुए करिया पठवा समीप स्थित विश्वकर्मा मंदिर में जाकर समाप्त हुई। शोभायात्रा में डीजे और झांकियों के साथ खासी भीड़ चल रही थी साथ ही बाइक जुलूस में युवा अपनी अपनी बाइकों में साथियों के साथ हाथों में पीला ध्वज लेकर भगवान विश्वकर्मा के जयकारे लगाते हुए आगे की ओर बढ रहे थे।
अखिल भारतीय विश्वकर्मा महासभा की विश्वकर्मा आर्मी के तत्वावधान में विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर शहर में भव्य शोभा यात्रा और बाइक जुलूस का आयोजन किया गया। शोभा यात्रा बड़ी चंद्रिका माता मंदिर से प्रारंभ हुई जो भटीपुरा, तहसील चैराहा, प्राइवेट बस स्टैंड, पीडब्ल्यूडी चैराहा, लवकुशनगर चैराहा, मां चंद्रिका चैराहा होते हुए वापस मंदिर पहुंचकर समाप्त हुई। जुलूस दौरान बाइकों पर बैठे युवा हाथों में पीले झंडे लिए भगवान विश्वकर्मा के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे तो वहीं कुछ लोग डीजे पर विश्व निर्माता के गीतों में झूमते हुए नजर आए। शोभायात्रा में आगे आगे डीजे चल रहे थे तो पीछे वाहनों में भगवान विश्वकर्मा के चित्रों की झांकियां और इसके बाद लोगों की भीड़ शामिल थी। समापन दौरान भगवान विश्वकर्मा की भक्तों ने भव्य महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़चढ कर हिस्सा लिया। आरती के बाद हवन पूजन कर प्रसाद का वितरण किया गया।
बाइक जुलूस व शोभायात्रा का समजसेवियो ने जगह जगह शोभा यात्रा का पुष्प वर्षा से स्वागत किया गया। समाज के लोगों ने जगह जगह शोभायात्रा में भगवान की आरती और प्रसाद वितरण किया। विश्वकर्मा आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि यह आयोजन जिले में विश्वकर्मा समाज द्वारा एक साथ मिलकर किया गया है और निरंतर हर साल ऐसा ही आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर प्रदेश उपाध्यक्ष से ललित विश्वकर्मा, जिलाध्यक्ष केसव विश्वकर्मा, प्रदेश महामंत्री कृष्णा विश्वकर्मा, कोषाध्यक्ष वासुदेव विश्वकर्मा, प्रिंस विश्वकर्मा, राजीव विश्वकर्मा, काशी, संतोष, धर्मेंद्र, ब्रम्हदत्त विश्वकर्ता, हरिशंकर प्रजापति, मोती, पुरुषोत्तम सहित तमाम समाज के हजारों लोग मौजूद रहे।
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कॉलेज में मनाई गई विश्वकर्मा जयंती, दिया श्रमदान का संदेश
स्वामी विवेकानंद महाविद्यालय में महर्षि विश्वकर्मा का जन्मदिवस मनाया गया। इस मौके पर महाविद्यालय प्राचार्य डाॅ. आरिफ राईन ने कहा कि विश्वकर्मा जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि हमारे समाज में श्रम, कौशल और सृजनशीलता का उत्सव है। भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का पहला वास्तुकार और इंजीनियर माना जाता है। उन्होंने जयंती के मौके पर घरों में एक एक दीपक जलाने की बात कही। प्रोफेसर क्रांति ने बताया कि परिश्रम ही सफता की कुंजी है। प्रोफेसर रोमाना ने कहा कि न कोई छोटा है न कोई बड़ा जो श्रम करे वही बड़ा है। कार्यक्रम में प्रोफेसर सनी जोसे कालिंस, अनस अंसारी, प्रभाकर सहित अन्य महाविद्यालय स्टाफ मौजूद रहा।

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