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मुकेश खन्ना के बयान से राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत पर फिर छिड़ी बहस

अभिनेता मुकेश खन्ना ने राष्ट्रगान जन गण मन की जगह वंदे मातरम् को लाने की मांग कर नया विवाद खड़ा कर दिया है। अपने बयान में उन्होंने राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर कई ऐसी बातें कहीं, जिनसे उनके बयान पर सवाल उठ रहे हैं।

मुकेश खन्ना ने कहा कि जन गण मन को हटाकर वंदे मातरम् को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने वंदे मातरम् को राष्ट्रगीत बनाने की बात कही, जबकि भारत में वंदे मातरम् पहले से ही राष्ट्रगीत का दर्जा प्राप्त है। इसी दौरान उन्होंने जन गण मन के शब्दों और इतिहास को लेकर भी टिप्पणी की।

उन्होंने कहा कि देश में वंदे मातरम् को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए और इसे स्कूलों में गाए जाने को लेकर खुशी जताई। उन्होंने यह भी बताया कि वह वंदे मातरम् से जुड़ा एक नया गीत तैयार कर रहे हैं, जिसे आने वाले महीनों में रिलीज करने की योजना है।

सरकार ने राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर जारी किए निर्देश

केंद्र सरकार ने राष्ट्रगान जन गण मन और राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन को लेकर राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों में कहा गया है कि दोनों को निर्धारित नियमों, सही शब्दों और सही उच्चारण के साथ ही गाया या बजाया जाए।

यदि किसी कार्यक्रम में दोनों प्रस्तुत किए जाते हैं तो तय क्रम का पालन किया जाएगा। राज्यों में राज्य गीत होने की स्थिति में भी निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।

स्कूलों में वंदे मातरम् को लेकर व्यवस्था

सरकार की ओर से स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत के साथ करने संबंधी निर्देश भी दिए गए हैं। वंदे मातरम् के दौरान निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करने और इसके अधिक अंतरों को शामिल करने की व्यवस्था बताई गई है।

हालांकि, सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले वंदे मातरम् बजाना अनिवार्य नहीं किया गया है। वहीं, यदि किसी न्यूजरील या डॉक्यूमेंट्री के हिस्से के रूप में राष्ट्रगीत प्रस्तुत किया जाता है तो उस दौरान दर्शकों के लिए खड़ा होना अनिवार्य नहीं होगा।

स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा है वंदे मातरम्

वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चटर्जी ने की थी। बाद में यह उनके उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित हुआ। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान वंदे मातरम् देशभक्ति और ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष का प्रमुख नारा बन गया था।

1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने वंदे मातरम् प्रस्तुत किया था। आज वंदे मातरम् भारत के राष्ट्रगीत के रूप में सम्मानित है, जबकि जन गण मन देश का राष्ट्रगान है

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