फतेहपुर। नदी का पानी जब खतरे की रेखा के करीब पहुंचता है तो चिंता महज सरकारी रजिस्टर में दर्ज एक आंकड़ा नहीं रह जाती। उसका असर कटरी के खेतों से लेकर कच्चे घरों की दीवारों तक दिखाई देने लगता है। हर बरसात में नदी की चाल के साथ जिंदगी गुजारने वाले परिवारों के लिए पानी का बढ़ता स्तर किसी चेतावनी से कम नहीं होता। जिले में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंचने से कटरी और नदी किनारे बसे गांवों में बेचैनी बढ़ गई है।
बाढ़ नियंत्रण खंड के 2 सितंबर की सुबह आठ बजे के रिकॉर्ड के मुताबिक गंगा का जलस्तर 100.56 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 100.86 मीटर है। यानी गंगा खतरे की रेखा से महज 30 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। कागज पर भले ही यह अंतर 30 सेंटीमीटर हो, लेकिन कटरी के लोगों के लिए यह फासला आने वाले खतरे की बड़ी चिंता बन गया है।
नदी का जलस्तर किसी एक आंकड़े पर स्थिर नहीं रहता। बारिश, ऊपरी क्षेत्रों से आने वाला पानी और नदी की धारा का बदलता रुख आने वाले घंटों में तस्वीर बदल सकता है। यही वजह है कि नदी किनारे बसे गांवों के लोग लगातार जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं। पानी बढ़ने की स्थिति में सबसे पहले कटरी के किसानों के सामने खेतों में खड़ी फसल बचाने की चुनौती होगी। इसके बाद गांवों तक पहुंचने वाले रास्तों, घरों और पशुओं की सुरक्षा का सवाल खड़ा होगा।
किसानों के लिए खेत महज जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि पूरे साल की कमाई का जरिया हैं। ऐसे में नदी का बढ़ता पानी उनकी मेहनत पर संकट बनकर मंडराने लगा है। उधर तिरहार क्षेत्र में यमुना का जलस्तर फिलहाल खतरे के निशान से काफी नीचे है। 2 सितंबर की सुबह आठ बजे यमुना का जलस्तर 92.72 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 100 मीटर है। इसके बावजूद बरसात के मौसम में नदी के बदलते मिजाज को देखते हुए तिरहार क्षेत्र के ग्रामीण भी सतर्क हैं।
बारिश तेज होने पर किसानों को खड़ी फसल की चिंता सताने लगती है। इसके साथ ही आवागमन और पशुओं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की चुनौती भी बढ़ जाती है। कटरी के लोगों के लिए बाढ़ का सबसे मुश्किल दौर वह होता है, जब पानी अभी घरों की चौखट तक नहीं पहुंचा होता, लेकिन खतरे की आशंका लगातार बढ़ती रहती है।
परिवार जरूरी सामान सुरक्षित करने लगते हैं, पशुओं के लिए सुरक्षित जगह तलाशते हैं और आसपास के लोगों से नदी के हालात की जानकारी लेते हैं। बुजुर्ग पिछली बाढ़ की यादों के आधार पर इस बार के खतरे का अंदाजा लगाने लगते हैं। किसानों को फसल की चिंता है तो परिवारों को घर और बच्चों की सुरक्षा की। पशुपालकों के लिए मवेशियों को सुरक्षित रखना भी बड़ी चुनौती होती है।
फिलहाल गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन महज 30 सेंटीमीटर का अंतर लोगों को सतर्क रहने का संदेश दे रहा है। नदी का हर सेंटीमीटर अब मायने रखता है। ग्रामीणों की नजर आसमान के साथ गंगा की धार पर भी टिकी है। बारिश थमने और जलस्तर में बढ़ोतरी रुकने से ही कटरी के लोगों को राहत मिल सकेगी। फिलहाल नदी की चाल ने खेतों, घरों और पशुओं की सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।
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