महोबा कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान हो और कुछ कर गुजरने का सच्चा जुनून हो, तो विपरीत परिस्थितियां और सीमित संसाधन भी आपकी राह नहीं रोक सकते। इस कहावत को अक्षरशः सच कर दिखाया है बुंदेलखंड के ऐतिहासिक वीर भूमि महोबा के एक साधारण परिवार के युवा अभिजीत गौरव ने। महोबा के सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, आल्हा चौक में क्लर्क के पद पर कार्यरत मदन गौरव के छोटे पुत्र अभिजीत गौरव ने आज खेल जगत में वह मुकाम हासिल किया है, जिस पर न सिर्फ उनके परिवार को, बल्कि पूरे महोबा और बुंदेलखंड क्षेत्र को गर्व है।अभिजीत अपनी कड़ी मेहनत, अटूट लगन और खेल के प्रति बेपनाह मोहब्बत की बदौलत आज देश की सबसे प्रतिष्ठित क्रिकेट अकादमियों में से एक, ‘गुरु नानक क्रिकेट अकादमी राय सिंह नगर राजस्थान’ में कोच की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कभी इसी अकादमी में एक छात्र और खिलाड़ी के रूप में कदम रखने वाले अभिजीत आज वहां देश-विदेश से आने वाले नवोदित खिलाड़ियों को क्रिकेट के गुर सिखा रहे हैं।
बचपन से ही था क्रिकेट के प्रति गहरा लगाव पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, अभिजीत को बचपन से ही क्रिकेट खेलने का बेहद शौक था। आल्हा चौक स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में पढ़ते हुए भी उनका ध्यान पढ़ाई के साथ-साथ खेल गतिविधियों में हमेशा आगे रहता था। महोबा जैसे छोटे शहर में जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं, टर्फ विकेट और उच्च स्तरीय कोचिंग का अभाव था, वहां अभिजीत ने स्थानीय मैदानों पर पसीना बहाकर अपनी प्रतिभा को निखारा। उनके पिता मदन गौरव ने भी अपने सीमित वेतन और साधारण पृष्ठभूमि के बावजूद अपने बेटे के सपनों को कभी मरने नहीं दिया और उसका हमेशा हौसला बढ़ाया।
खिलाड़ी से कोच बनने का सफर: प्रतिभा के दम पर हासिल किया मुकामअपनी रुचि और जुनून को करियर में बदलने के इरादे से अभिजीत ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज आशीष नेहरा द्वारा संचालित प्रतिष्ठित ‘गुरुनानक क्रिकेट अकादमी राय सिंह नगर राजस्थान’ ‘ का रुख किया। वहां उन्होंने एक खिलाड़ी के रूप में प्रवेश लिया और अपनी जादुई खेल तकनीक तथा अनुशासन से सबको प्रभावित किया।क्रिकेट की बारीकियों को समझने की उनकी अद्भुत क्षमता और खेल के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए अकादमी के प्रबंधन ने उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी। आज अभिजीत अपने ही दम पर वहां मुख्य कोच के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यह उनकी योग्यता का ही प्रमाण है कि महान क्रिकेटर आशीष नेहरा की अकादमी में आज बुंदेलखंड का यह लाल नए खिलाड़ियों का भविष्य संवार रहा है।
बुंदेलखंड के युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत
महोबा और आसपास के जिलों से जो भी लोग या युवा खिलाड़ी इस अकादमी में पहुंच रहे हैं, वे वहां अभिजीत को इस प्रतिष्ठित पद पर देखकर फूले नहीं समा रहे हैं। वहां आने वाले लोग और नए खिलाड़ी न केवल बुंदेलखंड के इस युवा कोच की खेल शैली के कायल हैं, बल्कि उनके सानिध्य में क्रिकेट की बारीकियां सीखकर अपनी खेल प्रतिभा को निखार रहे हैं।अभिजीत के सानिध्य में प्रशिक्षण ले रहे युवा खिलाड़ियों का कहना है कि अभिजीत सर न केवल तकनीकी रूप से बहुत मजबूत हैं, बल्कि उनका व्यवहार भी बेहद सहयोगात्मक है। एक छोटे शहर से निकलकर इतने बड़े मंच पर पहुंचना यह साबित करता है कि बुंदेलखंड की माटी में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है।
महोबा में जश्न का माहौल, मिल रही बधाइयां
अभिजीत की इस शानदार उपलब्धि की खबर जैसे ही महोबा और उनके पैतृक विद्यालय सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, आल्हा चौक में पहुंची, वहां हर्ष का माहौल व्याप्त हो गया। विद्यालय परिवार, स्थानीय खेल संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नगरवासियों ने मदन गौरव और उनके परिवार को मिठाई खिलाकर बधाई दी है।स्थानीय खेल प्रेमियों का कहना है कि अभिजीत ने महोबा का नाम राष्ट्रीय स्तर पर चमकाया है। अभिजीत की यह सफलता आज बुंदेलखंड के उन हजारों युवाओं के लिए एक बड़ी मशाल बन चुकी है, जो खेल की दुनिया में अपना करियर बनाना चाहते हैं लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण हिम्मत हार जाते हैं। अभिजीत ने सिद्ध कर दिया है कि मेहनत और लगन के आगे हर बाधा घुटने टेक देती है।
बचपन से ही था क्रिकेट के प्रति गहरा लगाव
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, अभिजीत को बचपन से ही क्रिकेट खेलने का बेहद शौक था। आल्हा चौक स्थित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में पढ़ते हुए भी उनका ध्यान पढ़ाई के साथ-साथ खेल गतिविधियों में हमेशा आगे रहता था। महोबा जैसे छोटे शहर में जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं, टर्फ विकेट और उच्च स्तरीय कोचिंग का अभाव था, वहां अभिजीत ने स्थानीय मैदानों पर पसीना बहाकर अपनी प्रतिभा को निखारा। उनके पिता मदन गौरव ने भी अपने सीमित वेतन और साधारण पृष्ठभूमि के बावजूद अपने बेटे के सपनों को कभी मरने नहीं दिया और उसका हमेशा हौसला बढ़ाया।
खिलाड़ी से कोच बनने का सफर: प्रतिभा के दम पर हासिल किया मुकाम अपनी रुचि और जुनून को करियर में बदलने के इरादे से अभिजीत ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज आशीष नेहरा द्वारा संचालित प्रतिष्ठित ‘गुरुनानक क्रिकेट अकादमी राय सिंह नगर राजस्थान ‘ का रुख किया। वहां उन्होंने एक खिलाड़ी के रूप में प्रवेश लिया और अपनी जादुई खेल तकनीक तथा अनुशासन से सबको प्रभावित किया।क्रिकेट की बारीकियों को समझने की उनकी अद्भुत क्षमता और खेल के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए अकादमी के प्रबंधन ने उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी। आज अभिजीत अपने ही दम पर वहां मुख्य कोच के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यह उनकी योग्यता का ही प्रमाण है कि महान क्रिकेटर आशीष नेहरा की अकादमी में आज बुंदेलखंड का यह लाल नए खिलाड़ियों का भविष्य संवार रहा है।
बुंदेलखंड के युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत
महोबा और आसपास के जिलों से जो भी लोग या युवा खिलाड़ी इस अकादमी में पहुंच रहे हैं, वे वहां अभिजीत को इस प्रतिष्ठित पद पर देखकर फूले नहीं समा रहे हैं। वहां आने वाले लोग और नए खिलाड़ी न केवल बुंदेलखंड के इस युवा कोच की खेल शैली के कायल हैं, बल्कि उनके सानिध्य में क्रिकेट की बारीकियां सीखकर अपनी खेल प्रतिभा को निखार रहे हैं।अभिजीत के सानिध्य में प्रशिक्षण ले रहे युवा खिलाड़ियों का कहना है कि अभिजीत सर न केवल तकनीकी रूप से बहुत मजबूत हैं, बल्कि उनका व्यवहार भी बेहद सहयोगात्मक है। एक छोटे शहर से निकलकर इतने बड़े मंच पर पहुंचना यह साबित करता है कि बुंदेलखंड की माटी में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है।
खिलाड़ी से कोच बनने का सफर: प्रतिभा के दम पर हासिल किया मुकाम
अपनी रुचि और जुनून को करियर में बदलने के इरादे से अभिजीत ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज गेंदबाज आशीष नेहरा द्वारा संचालित प्रतिष्ठित ‘गुरुनानक क्रिकेट अकादमी’ का रुख किया। वहां उन्होंने एक खिलाड़ी के रूप में प्रवेश लिया और अपनी जादुई खेल तकनीक तथा अनुशासन से सबको प्रभावित किया।क्रिकेट की बारीकियों को समझने की उनकी अद्भुत क्षमता और खेल के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए अकादमी के प्रबंधन ने उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी। आज अभिजीत अपने ही दम पर वहां मुख्य कोच के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यह उनकी योग्यता का ही प्रमाण है कि महान क्रिकेटर आशीष नेहरा की अकादमी में आज बुंदेलखंड का यह लाल नए खिलाड़ियों का भविष्य संवार रहा है।

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