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फरार बबलू पर और कसा पुलिस का शिकंजा, अब एक लाख का ईनाम

– खागा गैंगरेप कांड में तेज हुई तलाश, इटारसी रेलवे स्टेशन पर मिली लोकेशन
– फरार अभियुक्त बबलू।
फतेहपुर। खागा कोतवाली क्षेत्र के नौबस्ता रोड स्थित जंगल में मंगेतर के सामने युवती से सामूहिक दुष्कर्म के सनसनीखेज मामले में फरार मुख्य आरोपी बबलू सिंगरौर की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस ने शिकंजा और कस दिया है। पहले घोषित पचास हजार के इनाम को बढ़ाकर अब एक लाख किए जाने की तैयारी के बीच पुलिस की सात विशेष टीमें अलग-अलग राज्यों में लगातार दबिश दे रही हैं। सूत्रों के मुताबिक आरोपी के मध्य प्रदेश के इटारसी रेलवे प्लेटफॉर्म पर देखे जाने की सूचना के बाद पुलिस की तलाश और तेज कर दी गई है। इस बहुचर्चित वारदात में दो आरोपियों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है, जबकि मुख्य आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। बीते चौबीस अप्रैल को हुई इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। भीषण गर्मी के बीच रिश्तेदारी जा रहे युवक-युवती को नौबस्ता रोड के जंगल में रोककर तीन दरिंदों ने पहले युवक को बंधक बनाया, फिर युवती के साथ घंटों दरिंदगी की। विरोध करने पर मारपीट, अश्लील वीडियो बनाने और यूपीआई के जरिए रुपये ट्रांसफर कराने तक के आरोप सामने आए। पीड़ित पक्ष का आरोप था कि 25 अप्रैल को थाने पहुंचने के बाद भी मुकदमा तत्काल दर्ज नहीं किया गया। मामला पुलिस अधीक्षक तक पहुंचने पर एफआईआर लिखी गई और लापरवाही सामने आने पर खागा कोतवाली प्रभारी को पहले लाइन हाजिर और बाद में निलंबित कर दिया गया, साथ ही कस्बा चौकी इंचार्ज पर भी गाज गिरी। घटना के बाद पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए नामजद तीन आरोपियों में से दो को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, लेकिन मुख्य साजिशकर्ता बबलू सिंगरौर फरार हो गया। शुरुआती दौर में उस पर 25 हजार, फिर 50 हजार का इनाम घोषित किया गया था और अब पुलिस मुख्यालय स्तर से इसे एक लाख तक बढ़ा दिया गया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि सर्विलांस, मोबाइल लोकेशन, रेलवे मूवमेंट और रिश्तेदारों के नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। सात टीमें उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और आसपास के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। इटारसी रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध मूवमेंट मिलने के बाद एसओजी और सर्विलांस यूनिट को भी सक्रिय कर दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहना चाहती। फरार आरोपी और उसके नेटवर्क पर गैंगस्टर एक्ट लगाने की तैयारी की जा रही है। साथ ही उसकी अवैध संपत्तियों का ब्यौरा जुटाकर कुर्की की कार्रवाई की रूपरेखा बनाई जा रही है। प्रशासनिक सूत्र बताते हैं कि अपराध से अर्जित चल-अचल संपत्ति को चिन्हित करने के लिए राजस्व और पुलिस की संयुक्त रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है, ताकि आरोपी पर आर्थिक प्रहार भी किया जा सके। इससे स्पष्ट संकेत दिया जा रहा है कि पुलिस इस मामले में उदाहरण पेश करने के मूड में है। उधर पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा उपलब्ध करा दी गई है। चिकित्सा सहायता, कानूनी सहयोग और मनोवैज्ञानिक परामर्श की व्यवस्था भी प्रशासन की ओर से की गई है। शासन स्तर से इस मामले की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि आरोपियों को शीघ्र सजा दिलाई जा सके। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि पीड़िता पर किसी प्रकार का दबाव या समझौते का प्रयास करने वालों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है। इस जघन्य वारदात के बाद जिले की राजनीति भी उबाल पर है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अखिलेश यादव ने मामले को मुद्दा बनाकर सरकार को घेरा तो विभिन्न दलों के नेता पीड़िता के गांव पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। एक दिन पहले भाजपा जिलाध्यक्ष अन्नू श्रीवास्तव के नेतृत्व में जा रहे प्रतिनिधिमंडल को भी पुलिस ने रास्ते में रोककर नजरबंद कर दिया था, जिसके बाद प्रशासन की भूमिका पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। विपक्ष इसे कानून-व्यवस्था की विफलता बता रहा है, जबकि पुलिस-प्रशासन पूरे घटनाक्रम को नियंत्रण में रखने के लिए हाई अलर्ट मोड पर है।

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