भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने करीब चार साल बाद रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। RBI ने रेपो रेट को 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। इस फैसले का सीधा असर बैंक से मिलने वाले कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। खासतौर पर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI बढ़ने की संभावना है।
RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिन चली बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 7 अक्टूबर को नई ब्याज दरों का ऐलान किया। केंद्रीय बैंक ने महंगाई को लेकर चिंता जताते हुए अपना रुख सख्त किया है। संकेत दिए गए हैं कि आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश फिलहाल कम है।
महंगाई बढ़ने का अनुमान
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 में खुदरा महंगाई का अनुमान 5.0% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, वैश्विक आर्थिक दबाव और खराब मौसम के कारण खाद्य महंगाई का जोखिम बढ़ने की आशंका जताई गई है।
RBI का मानना है कि महंगाई पर नियंत्रण के लिए ब्याज दरों को कुछ समय तक ऊंचे स्तर पर रखना जरूरी हो सकता है। रेपो रेट बढ़ने से बैंकों के लिए RBI से पैसा लेना महंगा होता है और इसका असर आगे ग्राहकों को मिलने वाले कर्ज पर पड़ता है।
GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ा
महंगाई के दबाव के बीच RBI ने आर्थिक विकास को लेकर राहत भरा अनुमान दिया है। वित्त वर्ष 2026-27 में GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया गया है।
दूसरी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.2%, तीसरी तिमाही में 6.9% और चौथी तिमाही में 6.8% रहने का अनुमान है। पहली तिमाही वित्त वर्ष 2027-28 के लिए 7.1% की वृद्धि का अनुमान जताया गया है।
रेपो रेट बढ़ने से आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
अगर आपका होम, कार या पर्सनल लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर है और वह रेपो रेट से जुड़ा है, तो ब्याज दर बढ़ने पर EMI बढ़ सकती है। कुछ मामलों में EMI को समान रखते हुए लोन की अवधि बढ़ाई जा सकती है।
नए ग्राहकों के लिए भी होम और कार लोन महंगे हो सकते हैं। ब्याज दर बढ़ने से समान आय वाले व्यक्ति की लोन लेने की क्षमता भी कुछ कम हो सकती है।
क्या आगे ब्याज दरें और बढ़ सकती हैं?
RBI के बदले हुए रुख से संकेत मिलता है कि फिलहाल ब्याज दरों में कटौती की संभावना कमजोर हुई है। आने वाली मौद्रिक नीति बैठकों में महंगाई, आर्थिक विकास, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए RBI दरों को स्थिर रख सकता है या जरूरत पड़ने पर इनमें और बढ़ोतरी कर सकता है।
रेपो रेट क्या होता है?
रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI बैंकों को कम अवधि के लिए पैसा उपलब्ध कराता है। जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए पैसा जुटाना महंगा हो जाता है। इसका असर ग्राहकों को दिए जाने वाले लोन की ब्याज दरों पर पड़ सकता है।
इसके उलट, रेपो रेट कम होने पर बैंकों के लिए फंडिंग लागत घट सकती है और इसका फायदा ग्राहकों को कम ब्याज दर के रूप में मिल सकता है।
RBI ने दर क्यों बढ़ाई?
रेपो रेट बढ़ाने का प्रमुख उद्देश्य महंगाई पर नियंत्रण रखना है। ब्याज दर बढ़ने से कर्ज महंगा होता है, जिससे लोग और कंपनियां कम कर्ज ले सकती हैं। इससे बाजार में मांग का दबाव घटता है और महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
RBI के सामने इस समय महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है। केंद्रीय बैंक का ताजा फैसला इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
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