नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में ई-रिक्शा से जुड़े सुरक्षा संबंधी संभावित खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ऐसे दो मोबाइल ऐप्स को ऐप स्टोर से हटाने का आदेश दिया है, जिनके बारे में जानकारी सामने आई थी कि वे ई-रिक्शा को दूर से नियंत्रित या रोकने की क्षमता रखते हैं। BAT-BMS नाम से संचालित इन ऐप्स को हटाने की पुष्टि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सचिव एस. कृष्णन ने शुक्रवार को की।
आईटी सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि सरकार को हाल ही में इन दोनों ऐप्स की जानकारी मिली थी। प्रारंभिक जांच के बाद इन्हें तत्काल प्रभाव से ऐप स्टोर से हटाने के निर्देश दिए गए, जिनका पालन भी कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के ऐप्स सार्वजनिक सुरक्षा और साइबर सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय हो सकते हैं।
सीआईआई साइबर सिक्योरिटी समिट के दौरान पत्रकारों से बातचीत में एस. कृष्णन ने कहा, “यह सही है कि हमें कल ऐसे दो ऐप्स के बारे में जानकारी मिली थी और दोनों को ऐप स्टोर से हटा दिया गया है।” उन्होंने कहा कि सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है और आगे भी ऐसी किसी भी तकनीक या ऐप पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी, जो नागरिकों या सार्वजनिक परिवहन के लिए खतरा बन सकती है।
उन्होंने ऐप स्टोर संचालित करने वाली कंपनियों से भी अधिक सतर्क रहने की अपील की। उनका कहना था कि किसी भी मोबाइल ऐप को उपलब्ध कराने से पहले उसके उद्देश्य, सुरक्षा मानकों और संभावित दुरुपयोग की पूरी जांच की जानी चाहिए। यदि कोई ऐप सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा करता है, तो उसे प्लेटफॉर्म पर स्थान नहीं मिलना चाहिए।
आईटी सचिव ने कहा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को ऐप स्टोर संचालकों के समक्ष औपचारिक रूप से भी उठाएगी, ताकि भविष्य में इस प्रकार के हानिकारक या संदिग्ध ऐप्स आम लोगों के लिए उपलब्ध न हो सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी केवल ऐप उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उनकी अहम जिम्मेदारी है।
हालांकि सरकार ने फिलहाल इन ऐप्स की तकनीकी कार्यप्रणाली या इनके माध्यम से कितने ई-रिक्शा प्रभावित हुए, इस संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि ये ऐप भारत में कितने समय से उपलब्ध थे और कितने लोगों ने इन्हें डाउनलोड किया था। संबंधित एजेंसियां मामले की विस्तृत जांच कर रही हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट से जुड़े वाहनों और स्मार्ट डिवाइसों की बढ़ती संख्या के साथ इस प्रकार के साइबर खतरों का जोखिम भी बढ़ रहा है। ऐसे में ऐप डेवलपर्स, प्लेटफॉर्म कंपनियों और नियामक एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है, ताकि किसी भी तकनीक का दुरुपयोग न हो सके।
केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी यदि कोई ऐप राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक सुरक्षा या डिजिटल संरचना के लिए खतरा पैदा करता पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि नागरिकों की सुरक्षा और सुरक्षित डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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