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मई में मेहरबान तो जून में रूठा मानसून: भोजपुर के किसान कर रहे संघर्ष, ट्यूबवेल के सहारे शुरू की रोपनी

भोजपुर। मई महीने में समय से पहले हुई अच्छी बारिश से किसानों को बेहतर खरीफ सीजन की उम्मीद जगी थी, लेकिन जून में मानसून की धीमी रफ्तार ने उनकी चिंताएं बढ़ा दी हैं। पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण जिले के कई इलाकों में धान की रोपनी प्रभावित हुई है। ऐसे में किसान मजबूरी में ट्यूबवेल और निजी सिंचाई के साधनों के सहारे खेतों में रोपनी का काम शुरू कर रहे हैं।

धान की खेती के लिए जून का महीना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। सामान्य परिस्थितियों में इस दौरान अच्छी बारिश होने से खेतों में पर्याप्त पानी भर जाता है और रोपनी का काम तेजी से आगे बढ़ता है। लेकिन इस बार जून में अपेक्षित बारिश नहीं होने से खेत सूखे पड़े हैं, जिससे किसानों की लागत बढ़ गई है।

ट्यूबवेल बना किसानों का सहारा

जिले के कई गांवों में किसान डीजल और बिजली से चलने वाले ट्यूबवेल के माध्यम से खेतों में पानी पहुंचा रहे हैं। इसके लिए उन्हें अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो खेती की लागत और बढ़ जाएगी, जिसका असर उत्पादन पर भी पड़ सकता है।

किसानों के अनुसार, सिंचाई के लिए डीजल, बिजली और मजदूरी पर होने वाला खर्च पहले ही बढ़ चुका है। ऐसे में प्राकृतिक वर्षा नहीं होने से आर्थिक दबाव और अधिक बढ़ गया है।

बारिश की कमी से बढ़ी चिंता

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान की रोपनी के शुरुआती चरण में पर्याप्त नमी और पानी की आवश्यकता होती है। यदि समय पर बारिश नहीं होती है तो पौधों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है। हालांकि जिन क्षेत्रों में सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था है, वहां किसान किसी तरह रोपनी का कार्य जारी रखे हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय हो जाता है तो स्थिति में सुधार की संभावना है। लेकिन बारिश में अधिक देरी होने पर खेती की लागत बढ़ने के साथ-साथ उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।

किसानों की सरकार से उम्मीद

किसानों का कहना है कि यदि मानसून की स्थिति ऐसी ही बनी रही तो सरकार को सिंचाई सुविधाओं और डीजल पर मिलने वाली सहायता जैसी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना चाहिए, ताकि किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम हो सके।

वहीं, कृषि विभाग लगातार मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसानों को उपलब्ध संसाधनों के अनुसार सिंचाई तथा फसल प्रबंधन संबंधी सलाह दी जा रही है।

मानसून पर टिकी उम्मीदें

फिलहाल भोजपुर के किसानों की निगाहें आगामी दिनों की बारिश पर टिकी हैं। यदि जल्द ही मानसून सक्रिय होकर अच्छी वर्षा करता है, तो धान की रोपनी रफ्तार पकड़ सकती है और किसानों को राहत मिलेगी। लेकिन यदि बारिश में और देरी होती है, तो खरीफ सीजन की खेती पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।

कृषि क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि समय पर वर्षा न केवल उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे किसानों की लागत भी नियंत्रित रहती है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन भोजपुर सहित पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

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