-1976 में युगांडा के एंटेबे एयरपोर्ट पर दुनिया के सबसे साहसी सैन्य अभियानों में से एक को अंजाम दिया गया, जिसमें सभी हाईजैकर मारे गए, 102 बंधकों को सुरक्षित निकाला गया और मिशन का नेतृत्व कर रहे कमांडर योनी नेतन्याहू शहीद हो गए।
नई दिल्ली।
साल 1976 में दुनिया ने इतिहास के सबसे साहसी सैन्य अभियानों में से एक ‘ऑपरेशन थंडरबोल्ट’ देखा। फिलिस्तीनी आतंकवादियों द्वारा अपहृत विमान के 100 से अधिक यात्रियों को छुड़ाने के लिए इजराइल ने हजारों किलोमीटर दूर युगांडा के एंटेबे एयरपोर्ट पर ऐसा ऑपरेशन चलाया, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया।
1 जुलाई 1976 को इजराइल सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि आतंकवादियों ने बंधकों को मारने की धमकी दे रखी थी। प्रधानमंत्री यित्जाक राबिन, रक्षा मंत्री शिमोन पेरेस और सेना प्रमुख के बीच लगातार बैठकों का दौर चला। एक ओर आतंकियों से बातचीत जारी रही, वहीं दूसरी ओर गुप्त रूप से सैन्य कार्रवाई की तैयारी भी शुरू कर दी गई।
ऑपरेशन से पहले इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने रिहा किए गए यात्रियों से पूछताछ कर बंधकों की स्थिति, आतंकवादियों की संख्या और एंटेबे एयरपोर्ट के पुराने टर्मिनल की पूरी जानकारी जुटाई। बाद में हवाई तस्वीरें और नक्शे हासिल कर कमांडो ऑपरेशन की रणनीति तैयार की गई।
3 जुलाई को करीब 190 विशेष कमांडो चार हरक्यूलिस विमानों में सवार होकर इजराइल से रवाना हुए। मिशन का नेतृत्व स्पेशल फोर्स कमांडर योनी नेतन्याहू कर रहे थे। एयरपोर्ट पर उतरते ही कमांडो राष्ट्रपति ईदी अमीन के काफिले जैसी काली मर्सिडीज और लैंड रोवर गाड़ियों में पुराने टर्मिनल की ओर बढ़े, ताकि युगांडा के सैनिकों को शक न हो।
टर्मिनल पहुंचते ही इजराइली कमांडो ने आतंकवादियों पर धावा बोल दिया। कुछ ही मिनटों में सभी हाईजैकर मारे गए और बंधकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हालांकि इसी दौरान कंट्रोल टावर से हुई गोलीबारी में कमांडर योनी नेतन्याहू गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उन्होंने दम तोड़ दिया।
ऑपरेशन के दौरान कुल 102 बंधकों को जीवित बचा लिया गया, जबकि तीन बंधकों की मौत हुई। वापसी से पहले इजराइली सेना ने युगांडा के एयरबेस पर खड़े लड़ाकू विमानों को भी नष्ट कर दिया, ताकि उनका पीछा न किया जा सके।
करीब डेढ़ घंटे तक चले इस अभियान के बाद सभी विमान सुरक्षित इजराइल लौट आए, जहां हजारों लोगों ने सैनिकों और मुक्त कराए गए बंधकों का स्वागत किया। इस मिशन को आज भी दुनिया के सबसे सफल और साहसिक बंधक मुक्ति अभियानों में गिना जाता है।
कमांडर योनी नेतन्याहू की शहादत इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी कीमत रही। बाद में उनके छोटे भाई बेंजामिन नेतन्याहू राजनीति में आए और आगे चलकर इजराइल के प्रधानमंत्री बने।
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