चरखारी महोबा जनप्रतिनिधित्व की असली पहचान केवल मंचों पर मौजूदगी से नहीं, बल्कि उस समय होती है जब किसी परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो। जेवर बस अग्निकांड में चरखारी निवासीगण भाजपा जिला कोषाध्यक्ष नीरज गुप्ता की धर्मपत्नी श्रीमती सुनीता गुप्ता और ज्येष्ठ पुत्र शशांक गुप्ता की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। शुक्रवार को दोनों की पहचान की पुष्टि होने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
ऐसे कठिन समय में हमीरपुर-महोबा क्षेत्र के पूर्व सांसद कुंवर पुष्पेंद्र सिंह चंदेल चरखारी के साथ ही साथ ग्रेटर नोएडा पहुंचे और शोकाकुल परिवार के बीच खड़े दिखाई दिए। सेक्टर-94 स्थित मोर्चरी हाउस पहुंचकर उन्होंने परिजनों से मुलाकात की, घटना की जानकारी ली और आवश्यक प्रक्रियाओं के दौरान परिवार के साथ मौजूद रहे।
एक ओर नीरज गुप्ता अपने जीवनसाथी और बेटे को खोने के असहनीय सदमे से गुजर रहे थे, तो दूसरी ओर हादसे के बाद शवों की पहचान और पोस्टमार्टम जैसी कठिन औपचारिकताएं भी परिवार के सामने थीं। ऐसे समय में पूर्व सांसद का ग्रेटर नोएडा पहुंचना और परिवार के साथ खड़े रहना उनके लिए भावनात्मक सहारे के साथ-साथ व्यावहारिक सहयोग का भी माध्यम बना।
दुख में साथ खड़े होने का संदेश
चरखारी के लोगों के लिए यह हादसा व्यक्तिगत पीड़ा जैसा है। नीरज गुप्ता का परिवार लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है। हादसे की खबर सामने आने के बाद से ही चरखारी में लोग परिवार का हाल जानने के लिए लगातार संपर्क में रहे। पूर्व सांसद चंदेल भी परिवार के साथ लगातार संपर्क में रहे और स्थिति की जानकारी लेते रहे।
इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि जनप्रतिनिधित्व का अर्थ आखिर क्या है। जनता के बीच रहना केवल चुनाव और सार्वजनिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं होता। जब किसी परिवार को सबसे अधिक जरूरत होती है, तब उसके दुख में शामिल होना, उसके साथ खड़ा होना और कठिन परिस्थितियों में सहयोग करना भी जनप्रतिनिधि की सामाजिक भूमिका का हिस्सा है।
पूर्व सांसद कुंवर पुष्पेंद्र सिंह चंदेल का ग्रेटर नोएडा पहुंचकर नीरज गुप्ता के परिवार के साथ खड़ा होना इसी मानवीय संवेदना को सामने लाता है।
किसी परिवार के दुख को कम तो नहीं किया जा सकता, लेकिन उस दुख की घड़ी में उसके साथ खड़ा होकर उसे यह एहसास जरूर कराया जा सकता है कि वह अकेला नहीं है।
यही संदेश इस घटना से निकलकर सामने आता है—
“सच्चा जनप्रतिनिधि वही होता है, जो सुख में ही नहीं, बल्कि संकट और दुःख की घड़ी में भी अपने लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहे।”
News Wani
