अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी मामले ने अब नया राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा कर दिया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के एक बड़े दावे के बाद यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। चंपत राय ने कहा है कि चुनावी परिस्थितियों के चलते उस समय चोरी की घटना को लेकर एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई थी। उनके इस बयान ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर घटना के समय पुलिस में शिकायत क्यों नहीं दी गई और मामले को दबाए रखने की जरूरत क्यों महसूस हुई।
इस पूरे प्रकरण से जुड़ी एक डायरी सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है। डायरी में चढ़ावे की रकम, मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं और अंदरूनी गतिविधियों को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए गए हैं। इसमें यह संकेत भी दिया गया है कि मंदिर से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां लगातार बाहर पहुंच रही थीं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मंदिर की अंदरूनी जानकारी लीक करने वाला असली भेदिया कौन था और यह जानकारी किसके माध्यम से सार्वजनिक हुई।
डायरी में पूर्व आईएएस अधिकारी और राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के लगातार दिए गए इंटरव्यू को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। सवाल उठाया गया है कि उन्होंने लगातार कई इंटरव्यू किसके इशारे पर दिए और इन बातचीत के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था। क्या इन इंटरव्यू के जरिए किसी खास नैरेटिव को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई या फिर मंदिर से जुड़े विवादों को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया—यह जांच का विषय बन गया है।
चंपत राय के बयान के बाद विपक्ष और मंदिर से जुड़े मामलों पर नजर रखने वाले लोगों ने भी कई सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि यदि चढ़ावे की चोरी की घटना हुई थी तो चुनावी माहौल का हवाला देकर एफआईआर दर्ज न कराना कानून-व्यवस्था और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। वहीं, ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों का कहना है कि उस समय किसी भी तरह के विवाद से बचने और चुनावी माहौल को प्रभावित न करने के लिए मामला सार्वजनिक नहीं किया गया।
अब इस मामले में यह मांग उठ रही है कि डायरी में दर्ज आरोपों और चढ़ावा चोरी से जुड़े तथ्यों की स्वतंत्र जांच कराई जाए। जांच में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि चोरी की घटना कब हुई, मंदिर परिसर में उस समय कौन-कौन लोग मौजूद थे, चढ़ावे की निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी और घटना के बाद क्या कार्रवाई की गई। साथ ही, मंदिर की गोपनीय जानकारी बाहर पहुंचाने वाले व्यक्ति की पहचान भी जांच का अहम हिस्सा बन सकती है।
राम मंदिर निर्माण और प्रबंधन से जुड़े मामलों को लेकर देशभर में लोगों की गहरी भावनाएं जुड़ी हुई हैं। ऐसे में चढ़ावे की चोरी, एफआईआर दर्ज न होने और अंदरूनी जानकारी लीक होने जैसे आरोपों ने मामले की संवेदनशीलता और बढ़ा दी है। फिलहाल चंपत राय के बयान और सामने आई डायरी ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेंगे।
News Wani
