-सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद धन्नीपुर में मिली 5 एकड़ जमीन पर अब तक निर्माण शुरू नहीं हो सका। फंड की कमी, सरकारी मंजूरियों और कागजी प्रक्रियाओं ने परियोजना रोक रखी है।
अयोध्या। नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ होने के साथ ही बाबरी मस्जिद के बदले अयोध्या के धन्नीपुर गांव में 5 एकड़ जमीन नई मस्जिद के लिए आवंटित की गई थी। फैसले के करीब सात वर्ष बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। जिस भूमि पर मस्जिद, अस्पताल और संग्रहालय बनने की योजना थी, वहां फिलहाल खाली मैदान, तारबंदी और बच्चों का क्रिकेट खेलना ही नजर आता है।
इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन के अनुसार पूरे प्रोजेक्ट के लिए लगभग ₹300 करोड़ की आवश्यकता है, जबकि अब तक केवल करीब ₹1.5 करोड़ का चंदा ही जुट पाया है। इसी वजह से ट्रस्ट अब पहले एक छोटी मस्जिद बनाने की योजना पर विचार कर रहा है।
परियोजना में देरी की दूसरी बड़ी वजह आवश्यक सरकारी मंजूरियां हैं। अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी (ADA) के अनुसार ट्रस्ट को विभिन्न विभागों से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC), भूमि उपयोग संबंधी औपचारिकताएं और विकास शुल्क जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी हैं। अधिकारियों का कहना है कि जरूरी दस्तावेज और अनुमतियां पूरी होने के बाद ही नक्शा स्वीकृत किया जा सकेगा।
धन्नीपुर के स्थानीय लोगों का कहना है कि मस्जिद के साथ अस्पताल और अन्य सुविधाएं बनने से क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी परियोजना जमीन पर नहीं उतर सकी। कई ग्रामीण अब इसके जल्द बनने की उम्मीद भी छोड़ चुके हैं।
मस्जिद परियोजना से जुड़े कुछ पूर्व सदस्यों का आरोप है कि फंड जुटाने की रफ्तार धीमी रही और परियोजना को अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिल सका। वहीं ट्रस्ट का कहना है कि धन जुटाने के बाद संशोधित योजना के साथ दोबारा मंजूरी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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