-धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने दिए नए संकेत। पार्टी बनाने, प्रेशर ग्रुप बनने या देशव्यापी जनआंदोलन जारी रखने जैसे तीन विकल्पों पर चर्चा तेज।
नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अगले कदम को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले आंदोलन के समापन के दौरान संगठन के नेताओं ने संकेत दिए कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और जल्द ही नए चरण की शुरुआत हो सकती है।
CJP के नेताओं ने अब तक राजनीति में सीधे उतरने से स्पष्ट इनकार नहीं किया है। संगठन के प्रवक्ताओं का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य युवाओं की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना और शिक्षा व्यवस्था में सुधार सुनिश्चित कराना है। हालांकि फिलहाल संगठन खुद को एक जनआंदोलन और जवाबदेही तय करने वाले मंच के रूप में पेश कर रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार CJP के सामने तीन संभावित रास्ते हैं। पहला, भविष्य में राजनीतिक दल बनाकर चुनावी राजनीति में उतरना। दूसरा, देशभर में शिक्षा, पेपर लीक और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर जनआंदोलन जारी रखना। तीसरा, एक स्वतंत्र प्रेशर ग्रुप के रूप में सरकारों पर सुधार लागू करने का दबाव बनाए रखना।
संगठन की सबसे बड़ी ताकत उसका सोशल मीडिया नेटवर्क और युवाओं के बीच बढ़ता समर्थन माना जा रहा है। आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी और ऑनलाइन अभियान ने CJP को राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संगठन चुनावी राजनीति में उतरता है, तो उसे मजबूत संगठन, संसाधन, फंडिंग और जमीनी ढांचा तैयार करने जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। वहीं यदि वह आंदोलन जारी रखता है, तो लगातार जनसमर्थन बनाए रखना भी आसान नहीं होगा।
फिलहाल CJP का कहना है कि उसकी प्राथमिकता सरकार से शिक्षा सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और पेपर लीक के खिलाफ सख्त व्यवस्था लागू कराने की है। संगठन का दावा है कि इन मुद्दों पर वह आगे भी सरकार से जवाबदेही मांगता रहेगा।
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