सना। यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच जारी संघर्ष एक बार फिर तेज होता नजर आ रहा है। शुक्रवार को हूती विद्रोहियों ने अदन स्थित राष्ट्रपति भवन को निशाना बनाते हुए दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इसके साथ ही अदन एयरपोर्ट पर भी मिसाइल हमला किए जाने की खबर सामने आई है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि मिसाइलें अपने लक्ष्य पर लगीं या नहीं। हमले के बाद राष्ट्रपति भवन की ओर एंबुलेंस जाती हुई देखी गईं।
यमन सरकार के सैन्य प्रवक्ता के अनुसार, हमले में किसी के हताहत होने या घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। गौरतलब है कि करीब 15 दिन पहले भी राष्ट्रपति भवन परिसर पर मिसाइल हमला हुआ था, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और इमारत को काफी नुकसान पहुंचा था।
सऊदी अरब की ओर भेजा गया ड्रोन मार गिराया
यमन में हमलों के बीच सऊदी अरब ने भी एक ड्रोन को हवा में नष्ट करने का दावा किया है। सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के मुताबिक, शुक्रवार को मदीना के ऊपर एक ड्रोन को मार गिराया गया। इससे पहले मक्का में भी ड्रोन नष्ट किए जाने की जानकारी दी गई थी।
मक्का और मदीना इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र शहरों में शामिल हैं। मक्का में ग्रैंड मस्जिद और काबा स्थित हैं, जबकि मदीना में पैगंबर मोहम्मद की मस्जिद है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास ड्रोन गतिविधियों को लेकर सऊदी अरब की सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं।
अदन बना यमन सरकार के लिए अहम केंद्र
यमन का अदन शहर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का प्रमुख केंद्र है। वर्ष 2014 में हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद सरकार को अपना मुख्यालय वहां से हटाना पड़ा। इसके बाद अदन सरकार की गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया।
पिछले कुछ समय से अदन और उसके आसपास के इलाकों में हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। 28 अक्टूबर को भी अदन एयरपोर्ट को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई थी। यह हवाई अड्डा दक्षिणी यमन में राहत सामग्री और मानवीय सहायता पहुंचाने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।
2015 से जारी है यमन में संघर्ष
यमन में हूती विद्रोहियों और सरकारी सेना के बीच लंबे समय से गृहयुद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। वर्ष 2014 में हूतियों ने राजधानी सना पर नियंत्रण कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब ने कई देशों के साथ मिलकर हूतियों के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया।
सऊदी अरब का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमन सरकार को दोबारा सत्ता में स्थापित करना था। इस अभियान में सरकारी सेना को हवाई सहायता भी दी गई। दूसरी ओर, ईरान पर हूती विद्रोहियों को सैन्य और राजनीतिक समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं।
कई वर्षों के सैन्य अभियान के बावजूद हूती विद्रोहियों का प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया है। वे आज भी यमन के बड़े हिस्से में अपनी पकड़ बनाए हुए हैं।
आधुनिक हथियारों के बावजूद सऊदी अरब के सामने चुनौती
सऊदी अरब के पास आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइल और अत्याधुनिक रक्षा प्रणाली मौजूद हैं। इसके बावजूद हूतियों के खिलाफ लंबा सैन्य अभियान उसके लिए चुनौती बना हुआ है।
हूती विद्रोही कम लागत वाले ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल करते हैं। इन्हें रोकने के लिए सऊदी अरब को कई बार महंगी रक्षा मिसाइलों का सहारा लेना पड़ता है। इससे सैन्य खर्च में वृद्धि होती है।
इसके अलावा यमन का पहाड़ी और दुर्गम इलाका भी सैन्य कार्रवाई को कठिन बनाता है। हूतियों के ठिकानों का पता लगाना और उन्हें पूरी तरह नियंत्रित करना आसान नहीं है। जमीनी सैन्य अभियान की स्थिति में सैनिकों के हताहत होने और संघर्ष के लंबे समय तक जारी रहने का खतरा भी बना रहता है।
अदन में राष्ट्रपति भवन और एयरपोर्ट पर हुए ताजा हमलों के बाद यमन में तनाव बढ़ने की आशंका है। वहीं, सऊदी अरब की ओर ड्रोन भेजे जाने की घटना ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
News Wani
