लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में वन्यजीवों की अवैध तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की संयुक्त टीम ने मुंबई निवासी एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी प्रतिबंधित प्रजाति के वन्यजीवों को लेकर लखनऊ पहुंचा था। गिरफ्तारी के दौरान टीम ने उसके कब्जे से संरक्षित वन्यजीव भी बरामद किए हैं।
एसटीएफ को काफी समय से प्रदेश में संरक्षित वन्यजीवों की तस्करी करने वाले गिरोह के सक्रिय होने की सूचनाएं मिल रही थीं। इसके बाद अधिकारियों ने कई टीमों को गिरोह की गतिविधियों का पता लगाने और आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए थे।
इसी क्रम में अपर पुलिस अधीक्षक अवनीश्वर चंद्र श्रीवास्तव की टीम के उपनिरीक्षक फैजुद्दीन सिद्दीकी के नेतृत्व में कार्रवाई की जा रही थी। इस दौरान सूचना मिली कि मुंबई का एक वन्यजीव तस्कर प्रतिबंधित प्रजाति के जीवों के साथ लखनऊ आने वाला है। सूचना मिलने पर एसटीएफ ने वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की लखनऊ टीम के साथ संयुक्त अभियान चलाया।
टीम ने इरादत नगर मदेयगंज क्षेत्र में घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। उसकी पहचान मुंबई के बायकला निवासी फिरोज मुसरत खान के रूप में हुई है।
गोरखपुर और तराई के जंगलों से जुटाए जाते थे वन्यजीव
पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि वह वन्यजीवों की तस्करी करने वाले एक संगठित गिरोह से जुड़ा हुआ है। गिरोह के सदस्य गोरखपुर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर के जंगलों से प्रतिबंधित एवं संरक्षित पक्षियों और अन्य वन्यजीवों को इकट्ठा करते थे। इसके बाद इन जीवों को मुंबई के रास्ते विदेशों में भेजा जाता था।
आरोपी के अनुसार, गिरोह का नेटवर्क भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि दुबई, सऊदी अरब और बहरीन जैसे खाड़ी देशों तक फैला हुआ था। वहां तक वन्यजीवों की अवैध सप्लाई की जाती थी। पुलिस और संबंधित एजेंसियां अब गिरोह के अन्य सदस्यों तथा तस्करी से जुड़े नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी हैं।
वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत गंभीर अपराध है तस्करी
भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कई प्रजातियों को विशेष कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है। अनुसूची-1 में शामिल वन्यजीवों को सबसे उच्च स्तर का संरक्षण प्राप्त है। इनमें बाघ, तेंदुआ, हाथी, गैंडा, काला हिरण और फाल्कन जैसी प्रजातियां शामिल हैं।
इन संरक्षित जीवों का शिकार करना, उन्हें पकड़ना या उनका अवैध व्यापार करना कानूनन गंभीर अपराध है। वन्यजीवों की तस्करी से जैव विविधता और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को भी नुकसान पहुंचता है।
संयुक्त टीम की इस कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है, ताकि वन्यजीवों की खरीद-फरोख्त से लेकर विदेशों तक उनकी सप्लाई करने वाले पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
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