इजराइल में आम चुनाव के दौरान विदेशी हस्तक्षेप की आशंका को लेकर मामला चर्चा में आ गया है। चुनाव प्रक्रिया में बाहरी ताकतों की कथित भूमिका की जांच के लिए देश की खुफिया एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। इस मामले में विदेशी खुफिया एजेंसी मोसाद अब आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट की मदद करेगी। जांच में खासतौर पर इस बात का पता लगाया जाएगा कि क्या किसी विदेशी देश ने आर्थिक मदद के जरिए इजराइल की चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की थी।
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले की शुरुआत चुनाव के दौरान सामने आई कुछ खुफिया जानकारियों के बाद हुई। इजराइल की केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष और न्यायाधीश नोआम सोलबर्ग को शिन बेट प्रमुख डेविड जिनी ने गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराई थी। इसके बाद चुनाव में संभावित विदेशी फंडिंग और वोट खरीदने से जुड़े आरोपों की जांच के निर्देश दिए गए।
कतर और तुर्किये की भूमिका की भी जांच
जांच के दायरे में कतर और तुर्किये समेत कुछ विदेशी देशों की संभावित भूमिका को शामिल किया गया है। आरोपों के मुताबिक, विदेशी स्रोतों से इजराइल में धन पहुंचाकर अरब समुदाय के मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई हो सकती है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित तौर पर पैसा कहां से आया, किस माध्यम से पहुंचा और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था।
मोसाद को इस जांच में विशेष रूप से विदेशी संपर्कों और कतर से जुड़ी संभावित गतिविधियों की पड़ताल में सहयोग करना है। वहीं, शिन बेट मुख्य जांच एजेंसी के रूप में मामले के अन्य पहलुओं को देख रही है।
नेतन्याहू और विपक्षी नेताओं को दी गई जानकारी
इस संवेदनशील जांच की जानकारी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के अलावा विपक्षी नेता यायर लैपिड और येशर पार्टी के प्रमुख गादी आइजेनकोट को भी दी गई है। चुनाव समिति के अध्यक्ष की अनुमति से इन नेताओं को जांच से संबंधित गोपनीय जानकारियों के मुख्य बिंदुओं से अवगत कराया गया।
जांच एजेंसियां यह स्पष्ट करने की कोशिश कर रही हैं कि चुनाव के दौरान किसी विदेशी संगठन या देश ने राजनीतिक दलों, संगठनों अथवा मतदाताओं तक धन पहुंचाने का प्रयास किया था या नहीं। हालांकि, अभी तक इन आरोपों को साबित करने वाला अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है।
चुनाव आयोग ने नतीजों पर असर से किया इनकार
इजराइल की केंद्रीय चुनाव समिति ने साफ किया है कि विदेशी हस्तक्षेप की जांच का चुनाव परिणामों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। समिति के कार्यवाहक महानिदेशक डीन लिवने के मुताबिक, जांच किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाकर नहीं की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद उन्हें चुनाव समिति के अध्यक्ष को सौंपा जाएगा।
चुनाव अधिकारियों का कहना है कि जांच सीमित दायरे में की जा रही है और इसके आधार पर चुनावी नतीजों को बदलने की कोई स्थिति नहीं है। अधिकारियों ने चुनाव में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी या व्यवस्थित धांधली के दावों को भी खारिज किया है।
कतर ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर, कतर ने इजराइल के चुनाव में हस्तक्षेप करने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने कहा कि उनका देश इजराइल के चुनाव को प्रभावित करने या किसी राजनीतिक गतिविधि के लिए धन उपलब्ध कराने में शामिल नहीं रहा है। उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताते हुए विरोध जताया है।
तुर्किये की ओर से भी चुनाव में हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया गया है। ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने आरोपों की सच्चाई और कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करना महत्वपूर्ण होगा।
नेतन्याहू के गठबंधन को नहीं मिला बहुमत
इजराइल के 120 सदस्यीय संसद यानी नेसेट के चुनाव परिणामों में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। उपलब्ध अंतिम मतगणना के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिलीं, जबकि मुख्य विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें हासिल हुईं। अरब नेतृत्व वाले दलों को कुल 19 सीटें मिली हैं।
सरकार बनाने के लिए संसद में 61 सीटों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में चुनाव परिणामों के बाद सरकार गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों ने राजनीतिक माहौल को और चर्चा में ला दिया है।
फिलहाल, मोसाद और शिन बेट की जांच के निष्कर्षों का इंतजार किया जा रहा है। जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि चुनाव के दौरान विदेशी फंडिंग या वोट प्रभावित करने की कोई कोशिश हुई थी या नहीं। हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि इस जांच से घोषित चुनावी परिणामों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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