फतेहपुर। अतिवृष्टि के बाद तापमान में अचानक वृद्धि और खेतों में अत्यधिक नमी के चलते खरीफ की प्रमुख फसल धान में पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप बढ़ने की आशंका है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने और शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी है।
कृषि विभाग के अनुसार पत्ती लपेटक कीट की सुंडी धान की पत्तियों को रेशमी धागे से मोड़कर उनके अंदर छिप जाती है और पत्ती के हरे हिस्से को खुरचकर खाती है। इससे पत्तियों पर सफेद पारदर्शी धारियां दिखाई देने लगती हैं। प्रकोप अधिक होने पर पूरा खेत दूर से झुलसा हुआ नजर आ सकता है। पत्तियों का हरा भाग नष्ट होने से पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है और उत्पादन में भी कमी आ सकती है।
विभाग ने बताया कि यदि खेत में प्रति पौधा एक-दो मुड़ी हुई पत्तियां अथवा 10 प्रतिशत से अधिक पत्तियां प्रभावित दिखाई दें तो किसान तत्काल नियंत्रण की प्रक्रिया शुरू करें। शुरुआती प्रकोप में 10 से 12 मीटर लंबी रस्सी को फसल के ऊपर से खींचकर मुड़ी हुई पत्तियों को खोलने और सुंडियों को पानी में गिराने का उपाय किया जा सकता है। इसके अलावा खेत के आसपास लाइट ट्रैप लगाने की भी सलाह दी गई है।
किसानों को अत्यधिक यूरिया के प्रयोग से बचने, खेत की मेड़ों और आसपास के खरपतवार को साफ रखने तथा उचित दूरी पर धान की रोपाई करने की सलाह दी गई है। खेत में मकड़ी, लेडीबर्ड बीटल और ड्रैगनफ्लाई जैसे मित्र कीटों का संरक्षण भी पत्ती लपेटक कीट के नियंत्रण में सहायक हो सकता है।
प्रकोप की शुरुआत में ट्राइकोग्रामा कार्ड तथा नीम आधारित जैविक उपायों का प्रयोग किया जा सकता है। यदि कीट का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर से अधिक हो जाए तो कृषि विभाग की संस्तुति के अनुसार उचित कीटनाशक का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे धान की फसल का नियमित निरीक्षण करते रहें और कीट के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर समय रहते नियंत्रण के उपाय अपनाएं, ताकि फसल को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
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