नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से शनिवार देर रात जारी अधिसूचना में उनकी नियुक्ति की जानकारी दी गई। उनकी नियुक्ति उस तारीख से प्रभावी होगी, जिस दिन वह उपराज्यपाल पद का कार्यभार संभालेंगे।
62 वर्षीय डॉ. दिनेश शर्मा वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं। उनका राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त होने वाला था। अब कार्यकाल पूरा होने से पहले उन्हें केंद्र शासित प्रदेश की महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारी दी गई है। वह राज्यसभा के उपसभापति का दायित्व भी संभाल चुके हैं।
यूपी सरकार में निभा चुके हैं अहम जिम्मेदारी
डॉ. दिनेश शर्मा 2017 से 2022 के बीच उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे। इस दौरान उनके पास माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी रही। इससे पहले वह लखनऊ के महापौर के रूप में भी दो बार कार्य कर चुके हैं।
राजनीति में आने से पहले डॉ. शर्मा लखनऊ विश्वविद्यालय में वाणिज्य विभाग के प्रोफेसर रहे। भाजपा संगठन में भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वह पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और गुजरात प्रभारी जैसे पदों पर रह चुके हैं। 2023 में उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुना गया था।
अंडमान-निकोबार के लिए अनुभव होगा महत्वपूर्ण
अंडमान-निकोबार देश की रणनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। पर्यटन, बुनियादी ढांचे और स्थानीय जनसुविधाओं के विकास की यहां काफी संभावनाएं हैं। डॉ. शर्मा ने नई जिम्मेदारी को लेकर कहा है कि क्षेत्र में केंद्र सरकार की नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू कराने के साथ ही स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकताओं में रहेगा।
उन्होंने अंडमान-निकोबार को देश के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र बताते हुए कहा कि पर्यटन की दृष्टि से भी इसका विशेष महत्व है। उनके मुताबिक क्षेत्र में पर्यटन, आधारभूत सुविधाओं और जनसुविधाओं के विकास के लिए काफी काम किया जा सकता है।
यूपी की राजनीति के लिहाज से भी नियुक्ति महत्वपूर्ण
डॉ. दिनेश शर्मा की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। उनकी नई जिम्मेदारी को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, उनकी नियुक्ति को केवल राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी, क्योंकि उनके पास विश्वविद्यालय, नगर प्रशासन, राज्य सरकार, संगठन और संसद—इन सभी स्तरों पर काम करने का लंबा अनुभव है।
राज्यसभा में भी डॉ. शर्मा की सक्रियता रही है। अगस्त 2026 तक उनकी सदन में उपस्थिति 94 प्रतिशत बताई गई है। उन्होंने 226 सवाल पूछे और 34 बहसों में हिस्सा लिया। ऐसे में प्रशासन और राजनीति दोनों का अनुभव अब अंडमान-निकोबार के प्रशासन में उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
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