फतेहपुर। हथगाम ब्लॉक के ग्राम चढ़ोआ मजरा सिमरमऊ में शनिवार को “मेरा रेशम, मेरा अभिमान 2.0” के तहत एरी रेशमकीट पालन पर प्रौद्योगिकी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। केंद्रीय रेशम बोर्ड-एरी अनुसंधान प्रसार केंद्र ने उत्तर प्रदेश रेशम विकास विभाग के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों को एरी रेशमकीट पालन की वैज्ञानिक एवं उन्नत तकनीकों की जानकारी दी। कार्यक्रम में 61 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान “मेरा रेशम, मेरा अभिमान” के नारों से गांव गूंज उठा। किसानों को वैज्ञानिक तरीके से एरी रेशमकीट पालन, उन्नत अरंडी उत्पादन, उसकी आर्थिक उपयोगिता, कीटाणुशोधन एवं स्वच्छता सहित व्यावसायिक स्तर पर एरी रेशमकीट पालन अपनाकर आय बढ़ाने के उपायों की व्यावहारिक जानकारी दी गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएसबी/ईआरआईसी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डीके जिज्ञासु ने की। वहीं रेशम विकास विभाग उत्तर प्रदेश के एसडीओ, एपी निगम सहित विमल सक्सेना, राजनारायण एवं राम जीवन ने किसानों को एरी रेशमकीट पालन की उन्नत तकनीकों और उत्पादन बढ़ाने के वैज्ञानिक तरीकों से अवगत कराया।
विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि वैज्ञानिक पद्धति से एरी रेशमकीट पालन अपनाकर कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। साथ ही अरंडी की उन्नत खेती और एरी रेशम के व्यावसायिक उत्पादन से ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान सुरेंद्र कुमार मौर्य ने कार्यक्रम के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने गांव में एरी रेशम के विकास के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने गांव को प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए चयनित किए जाने पर केंद्रीय रेशम बोर्ड और उत्तर प्रदेश रेशम विकास विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।
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